सीमा व्यापार की फिर से शुरुआत
उत्तराखंड के पिथौरागढ़ जिले में भारत-चीन सीमा व्यापार का द्वार छह साल के लंबे इंतजार के बाद दोबारा खुल गया है। लिपुलेख दर्रे के माध्यम से होने वाला यह व्यापार 26 जून को फिर से शुरू होने जा रहा है। प्रशासन ने इस कवायद के तहत पहले चरण के लिए 26 भारतीय व्यापारियों और उनके सहायकों को ट्रेड पास जारी कर दिए हैं।
प्रशासनिक तैयारियां और व्यवस्था
धारचूला के उपजिलाधिकारी और ट्रेड ऑफिसर आशीष जोशी ने जानकारी दी कि पहले दल में 17 व्यापारी और 9 सहायक शामिल हैं। इन व्यापारियों ने अपना सामान पहले ही लिपुलेख दर्रे के निकट स्थित गांवों के गोदामों में पहुंचा दिया है। व्यापारिक सुगमता के लिए गुंजी में एक कस्टम कार्यालय भी स्थापित किया गया है। सीमा पार सामान ले जाने के लिए नाभीढांग के पास घोड़ों और खच्चरों के लिए विशेष व्यवस्था की गई है, जो दर्रे से करीब 600 मीटर की दूरी पर स्थित है। अब तक प्रशासन को कुल 103 से अधिक आवेदन प्राप्त हो चुके हैं, जिसके बाद अब 25 व्यापारियों के दूसरे दल के लिए भी जल्द पास जारी किए जाएंगे।
पुराने स्टॉक और चुनौतियों का सामना
वर्ष 1991 में शुरू हुए इस सीमा व्यापार को 2020 में कोविड-19 महामारी के कारण स्थगित कर दिया गया था। भारत-चीन व्यापार समिति के अध्यक्ष जीवन सिंह रोंगकाली ने बताया कि व्यापारियों के सामने मुख्य चुनौती छह साल पहले तिब्बत में छूटे अपने पुराने स्टॉक की स्थिति का पता लगाना है। व्यापारियों का कहना है कि वे पहले अपने सामान का निरीक्षण करेंगे और नुकसान का आकलन करने के उपरांत सरकार से उचित राहत पैकेज की मांग करेंगे ताकि लंबे समय तक गोदामों में सामान रहने से हुई क्षति की भरपाई हो सके।
स्थानीय अर्थव्यवस्था को नई उम्मीद
सीमा पर फिर से शुरू हुई इस हलचल से स्थानीय निवासियों और व्यापारियों में काफी उत्साह है। यह कदम न केवल सीमावर्ती क्षेत्रों में आर्थिक गतिविधियों को गति देगा, बल्कि स्थानीय स्तर पर रोजगार और आय के नए साधन भी विकसित करेगा।
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