क्या जेलीफिश जैसे ड्रोन ने गिराया था अमेरिकी फाइटर जेट F-15E? पायलट के खुलासे से मची हलचल

ईरान में गिरे अमेरिकी फाइटर जेट F-15E के पायलट ने एक चौंकाने वाला दावा किया है कि उसने हवा में अजीबोगरीब जेलीफिश जैसे ड्रोन्स का झुंड देखा था।

पायलट के दावे से हैरान सैन्य विशेषज्ञ

ईरान के ऊपर उड़ान भर रहे अमेरिकी लड़ाकू विमान F-15E के दुर्घटनाग्रस्त होने की घटना एक बार फिर चर्चा में है। 3 अप्रैल को हुई इस घटना को लेकर विमान के पायलट ने जो जानकारी साझा की है, वह आधुनिक युद्ध नीति के जानकारों को सोचने पर मजबूर कर रही है। पायलट का कहना है कि उसने आसमान में ड्रोन्स का एक ऐसा समूह देखा जो बिल्कुल जेलीफिश जैसा दिखाई दे रहा था। यह दावा यदि सच साबित होता है, तो यह माना जाएगा कि ईरान के पास ड्रोन तकनीक का एक ऐसा खतरनाक स्तर मौजूद है जिसके बारे में दुनिया को अभी तक जानकारी नहीं थी।

रेस्क्यू ऑपरेशन और आधिकारिक खामोशी

3 अप्रैल को हुई इस घटना में अमेरिकी फाइटर जेट को निशाना बनाया गया था। संघर्ष के इतिहास में यह एक दुर्लभ वाकया था। दुर्घटना के तुरंत बाद अमेरिका ने एक विशेष सैन्य अभियान चलाया, जिसके जरिए पायलट और हथियार प्रणाली अधिकारी यानी WSO को सुरक्षित बचा लिया गया। हालांकि, घटना के इतने समय बाद भी ट्रंप प्रशासन की ओर से विमान गिरने के सटीक कारणों पर कोई भी आधिकारिक बयान जारी नहीं किया गया है।

क्या एलियन जैसी दिखती है ईरान की तकनीक?

शुरुआती दौर में यह माना जा रहा था कि F-15E को ईरान की माजिद इन्फ्रारेड एयर डिफेंस मिसाइल सिस्टम के जरिए गिराया गया होगा। लेकिन अब पायलट के बयान से पूरी कहानी बदल गई है। पायलट ने बताया कि उसने आसमान में कई ड्रोन्स को आपस में जुड़े हुए देखा, जिनमें से नीचे की ओर छोटे-छोटे ड्रोन्स लटके हुए थे। पायलट के अनुसार, यह दृश्य किसी रहस्यमयी एलियन तकनीक जैसा प्रतीत हो रहा था।

जेलीफिश ड्रोन स्वार्म की कार्यक्षमता

विशेषज्ञों का मानना है कि यह जेलीफिश ड्रोन स्वार्म तकनीक का हिस्सा हो सकता है। इसकी कार्यप्रणाली कुछ इस तरह है:

  • इसमें एक बड़ा मदरशिप ड्रोन होता है जो कई छोटे ड्रोन्स को नियंत्रित करता है।
  • सभी ड्रोन्स मेश नेटवर्किंग तकनीक से एक-दूसरे से जुड़े रहते हैं और एक इकाई के रूप में काम करते हैं।
  • दूर से देखने पर यह पूरा ढांचा समुद्र में तैरती जेलीफिश जैसा दिखता है।

परंपरागत रडार के लिए बड़ी चुनौती

यह तकनीक पारंपरिक रडार और एयर डिफेंस सिस्टम को चकमा देने में सक्षम है। यह कम ऊंचाई पर रहकर न केवल निगरानी करती है, बल्कि एक साथ हमला करने की क्षमता भी रखती है। हालांकि, अमेरिकी खुफिया एजेंसियां अभी भी इस दावे की पुष्टि करने से बच रही हैं, क्योंकि पायलट उस घटना में गंभीर रूप से घायल हुआ था, जिससे उसके द्वारा देखी गई चीजों की व्याख्या पर सवाल उठ सकते हैं।

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