ऊर्जा सुरक्षा के लिए नई रणनीति
वैश्विक ऊर्जा बाजार में जारी उठापटक के बीच भारत ने अपनी ईंधन आपूर्ति श्रृंखला को सुरक्षित करने के लिए एक महत्वपूर्ण बदलाव किया है। वर्तमान में देश की कच्चे तेल की घरेलू मांग 50 लाख बैरल प्रतिदिन के स्तर पर है। इस विशाल आवश्यकता को बिना किसी बाधा के पूरा करने के लिए सरकार ने अपने आयात स्रोतों में विविधता लाने पर ध्यान केंद्रित किया है।
तेल और गैस के लिए नए बाजार
अमेरिका और ईरान के बीच शांति समझौते के बाद कच्चे तेल के बाजारों में स्थिरता के आसार बने हैं, लेकिन एलएनजी (LNG) आपूर्ति में अनिश्चितता अब भी बरकरार है। इस चुनौती से निपटने के लिए भारत ने अपनी पारंपरिक निर्भरता को कम करते हुए नई पहल की है:
- रूस से कच्चे तेल की निरंतर आपूर्ति बनी हुई है, जिससे भारतीय रिफाइनरियों को लाभ हो रहा है।
- भारत अब अमेरिका, ब्राजील, वेनेजुएला और पश्चिम अफ्रीका के अंगोला से भी कच्चा तेल आयात कर रहा है।
- गैस और एलएनजी के लिए अब ब्राजील और मोजाम्बिक जैसे नए वैश्विक आपूर्तिकर्ताओं की ओर रुख किया गया है।
क्यों जरूरी है यह बदलाव?
स्ट्रैट ऑफ होर्मुज (Strait of Hormuz) में होने वाले किसी भी भू-राजनीतिक तनाव का सीधा असर भारत की ऊर्जा सुरक्षा पर न पड़े, इसके लिए यह कदम उठाए गए हैं। जिन देशों से अब तेल और गैस मंगाई जा रही है, उन पर होर्मुज जलडमरूमध्य के विवाद का प्रभाव नगण्य है। सरकार का मुख्य उद्देश्य अंतरराष्ट्रीय बाजार के उतार-चढ़ाव से घरेलू कीमतों को बचाना और ऊर्जा की निर्बाध आपूर्ति सुनिश्चित करना है।
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