वाल्मीकि टाइगर रिज़र्व में दिखा 1500 किलो वजनी दुर्लभ जीव, बाघ भी जिसे देख काटते हैं रास्ता

पश्चिमी चंपारण के वाल्मीकि टाइगर रिज़र्व में सैलानियों को इंडियन बाइसन यानी गौर का झुंड देखने को मिला। अपनी विशालकाय शारीरिक बनावट के कारण यह जानवर जंगल के राजा यानी टाइगर के लिए भी चुनौती बना रहता है।

विशालकाय जीवों का दीदार

बिहार के पश्चिमी चंपारण स्थित वाल्मीकि टाइगर रिज़र्व (VTR) इन दिनों वन्यजीव प्रेमियों के लिए आकर्षण का मुख्य केंद्र बना हुआ है। भीषण गर्मी के बावजूद सफारी का आनंद लेने आए पर्यटकों को हाल ही में एक दुर्लभ नजारा देखने को मिला, जब उन्हें बेहद करीब से इंडियन बाइसन यानी गौर का झुंड दिखाई दिया। आरा और मुजफ्फरपुर से आए सैलानियों के लिए यह सफारी एक यादगार अनुभव बन गई।

शक्ति और कद-काठी

नेचर गाइड राजीव आर्या के अनुसार, गौर गाय प्रजाति का एक अत्यंत शक्तिशाली वन्यजीव है जो मुख्य रूप से घने जंगलों में पाया जाता है। इनकी शारीरिक बनावट बेहद मस्कुलर और प्रभावशाली होती है। एक वयस्क गौर की ऊंचाई 7 फीट तक हो सकती है और इनका वजन 1000 से 1500 किलो के बीच होता है। इनकी ताकत का अंदाजा इसी बात से लगाया जा सकता है कि ये मिनी पिकअप वैन को भी आसानी से पलट सकते हैं।

सफेदा के नाम से मशहूर

इन जीवों की एक बड़ी पहचान इनके पैरों का रंग है। गौर के पैर घुटनों तक सफेद होते हैं, जो बिल्कुल मोजे की तरह दिखाई देते हैं। इसी विशिष्ट शारीरिक विशेषता के कारण इन्हें स्थानीय स्तर पर सफेदा के नाम से भी पुकारा जाता है। ये आमतौर पर 5 से 10 की संख्या वाले झुंड में रहना पसंद करते हैं।

बाघ भी बनाते हैं दूरी

वन्यजीव विशेषज्ञों का मानना है कि अपनी अपार शक्ति के कारण गौर जंगल में सुरक्षित महसूस करते हैं। सुरक्षा के लिहाज से जंगल का राजा माना जाने वाला टाइगर भी अक्सर गौर के सामने आने से परहेज करता है और उनसे दूरी बनाए रखना ही बेहतर समझता है।

VTR में कहां देखे जा सकते हैं गौर

वाल्मीकि टाइगर रिज़र्व के भीतर कई ऐसे क्षेत्र हैं जहां इन जीवों की मौजूदगी अक्सर दर्ज की जाती है। विशेष रूप से वाल्मीकिनगर, गनौली, गोवर्धना और मांगुराहा रेंज में पर्यटक इन्हें झुंड में चरते हुए देख सकते हैं। खासकर बरसात के मौसम में इनके दिखाई देने की संभावना काफी बढ़ जाती है।

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