मंदिर प्रशासन के खिलाफ नाराजगी
मध्य प्रदेश के उज्जैन स्थित विश्व प्रसिद्ध महाकालेश्वर मंदिर में दर्शन व्यवस्था को लेकर विवाद गहरा गया है। 24 जून 2026 को विश्व हिंदू परिषद और बजरंग दल के कार्यकर्ताओं ने मंदिर के शंख द्वार पर बड़ी संख्या में जुटकर जोरदार प्रदर्शन किया। कार्यकर्ताओं ने मंदिर की वर्तमान कार्यप्रणाली पर कड़े सवाल उठाए और प्रशासन के खिलाफ नारेबाजी की।
वीआईपी प्रोटोकॉल और श्रद्धालुओं की परेशानी
प्रदर्शनकारियों का मुख्य विरोध मंदिर में व्याप्त वीआईपी संस्कृति को लेकर है। उन्होंने आरोप लगाया कि विशेष प्रोटोकॉल के चलते आम श्रद्धालुओं को दर्शन के लिए घंटों इंतजार करना पड़ता है, जो कि न्यायसंगत नहीं है। इसके अलावा, हाल के दिनों में सुरक्षाकर्मियों द्वारा भक्तों के साथ कथित रूप से किए गए अभद्र व्यवहार और मारपीट की घटनाओं ने भारी रोष पैदा कर दिया है।
लाइव प्रसारण और पारदर्शिता पर सवाल
प्रदर्शन के दौरान कार्यकर्ताओं ने मंदिर के लाइव दर्शन प्रसारण को लेकर भी कई सवाल खड़े किए। उनका तर्क है कि निर्धारित समयावधि में व्यवस्था बहाल न होने से दूर-दराज से आने वाले श्रद्धालु परेशान हो रहे हैं। साथ ही, भस्म आरती और दर्शन के नाम पर होने वाली धोखाधड़ी की शिकायतों पर भी तत्काल प्रभाव से रोक लगाने की मांग की गई है।
आंदोलन जारी रखने की चेतावनी
विश्व हिंदू परिषद के जिला मंत्री जसवंत सिंह ठाकुर ने स्पष्ट रूप से कहा कि महाकाल मंदिर में वीआईपी संस्कृति पूरी तरह समाप्त होनी चाहिए। उन्होंने चेतावनी दी है कि यदि मंदिर प्रशासन ने अपनी व्यवस्थाओं में सुधार नहीं किया और आम भक्तों को राहत नहीं दी, तो संगठन चरणबद्ध तरीके से अपना आंदोलन जारी रखेगा।
प्रशासन की चुप्पी
इस पूरे घटनाक्रम के बाद मंदिर प्रशासन की ओर से अभी तक कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया सामने नहीं आई है। हालांकि, इस प्रदर्शन ने एक बार फिर मंदिर प्रबंधन की व्यवस्थाओं और वीआईपी प्रोटोकॉल को बहस का विषय बना दिया है। आम श्रद्धालुओं की सुविधा को प्राथमिकता देने की मांग ने अब तूल पकड़ लिया है।
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