उज्जैन में बिजली तंत्र को किया जा रहा हाईटेक
धार्मिक नगरी उज्जैन में साल 2028 में आयोजित होने वाले सिंहस्थ (महाकुंभ) की तैयारियां युद्ध स्तर पर शुरू हो गई हैं। महाकाल की नगरी में आने वाले करोड़ों श्रद्धालुओं को निर्बाध बिजली सुविधा मिले, इसके लिए विद्युत विभाग ने व्यापक कार्ययोजना तैयार की है। शहर और मेला क्षेत्र में आधुनिक उपकरणों के साथ नई बिजली लाइनों का जाल बिछाया जा रहा है।
चार नए सबस्टेशन की सौगात
विद्युत विभाग के मुख्य अभियंता सुरेश वर्मा के अनुसार, आयोजन को सफल बनाने के लिए उज्जैन में चार नए सबस्टेशन तैयार किए जा रहे हैं। इनमें से नाकतली सबस्टेशन का काम लगभग पूरा हो चुका है, जबकि वाल्मीकि धाम केंद्र इसी महीने कार्य करना शुरू कर देगा। इसके अलावा, चारधाम मंदिर और नानाखेड़ा क्षेत्र में भी निर्माण कार्य तेजी से आगे बढ़ रहे हैं।
अत्याधुनिक तकनीकी का इस्तेमाल
बिजली विभाग द्वारा किए जा रहे कार्यों का विवरण इस प्रकार है:
- प्रत्येक नए सबस्टेशन में 10-10 एमवीए क्षमता वाले दो-दो ट्रांसफॉर्मर स्थापित किए जाएंगे।
- लगभग 30 किलोमीटर लंबी 33 केवी और 90 किलोमीटर लंबी 11 केवी बिजली लाइनें बिछाई जा रही हैं।
- आपूर्ति को सुरक्षित बनाने के लिए आधुनिक फोर्टिफाइड कंडक्टर तकनीक का उपयोग किया जा रहा है।
- शहर में भूमिगत केबलीकरण और पुराने ट्रांसफॉर्मरों की क्षमता विस्तार का काम जारी है।
विशेष डिवीजन और कर्मचारियों की नियुक्ति
सिंहस्थ की जरूरतों को देखते हुए एक विशेष सिंहस्थ विद्युत डिवीजन का गठन किया जा रहा है। आयोजन के दौरान 750 मेगावाट बिजली उपलब्ध कराने का लक्ष्य रखा गया है। इसके साथ ही, अगले 3 महीनों के भीतर 2 से 2.5 हजार अतिरिक्त कर्मचारियों की तैनाती की जाएगी। मेला क्षेत्र और शहर को अलग-अलग सेक्टरों में विभाजित कर अधिकारियों को जिम्मेदारी सौंपी जा रही है, ताकि श्रद्धालुओं और संतों को किसी प्रकार की विद्युत समस्या का सामना न करना पड़े। दो नए 132 केवी सबस्टेशन का निर्माण भी इस व्यवस्था को और अधिक सुदृढ़ बनाएगा।
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