नेपाल की पावन भूमि पर स्थित प्रमुख तीर्थ
बिहार के सीतामढ़ी बॉर्डर से सटा नेपाल का इलाका न केवल भौगोलिक रूप से करीब है, बल्कि यह पौराणिक और सांस्कृतिक धरोहरों का केंद्र भी है। त्रेतायुग के इतिहास को संजोए यहां के 5 प्रमुख तीर्थ स्थल सनातन धर्म के अनुयायियों के लिए गहरी आस्था का केंद्र हैं। इन स्थानों की यात्रा करना भक्तों के लिए एक आत्मिक अनुभव माना जाता है।
जनकपुरधाम और जानकी मंदिर
सीमा पार करते ही सबसे पहले जनकपुरधाम का नाम आता है। यह स्थान राजा जनक की नगरी और माता सीता का जन्मस्थान होने के कारण विश्व भर में प्रसिद्ध है। यहाँ का भव्य जानकी मंदिर अपनी अनूठी वास्तुकला के लिए जाना जाता है। दुनियाभर से श्रद्धालु यहाँ माता जानकी और भगवान श्रीराम के दर्शन के लिए पहुंचते हैं।
जलेश्वर स्थान में जलमग्न शिवलिंग
जनकपुर के पास स्थित जलेश्वर स्थान एक अद्भुत धार्मिक स्थल है। यहाँ के मंदिर में स्थापित शिवलिंग सदैव पानी के भीतर डूबा रहता है। भक्तों का मानना है कि इस जलमग्न और चमत्कारी शिवलिंग के दर्शन करने से कष्टों का निवारण होता है और पापों से मुक्ति मिलती है।
धनुषाधाम जहाँ गिरा था शिव धनुष
धनुषाधाम का इतिहास त्रेतायुग से जुड़ा हुआ है। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, स्वयंवर के दौरान भगवान श्रीराम द्वारा तोड़े गए शिव जी के पिनाक धनुष का एक टुकड़ा यहाँ गिरा था। आज भी उस विशाल धनुष के अवशेष पत्थर के रूप में यहाँ मौजूद हैं, जो इस पौराणिक कथा की पुष्टि करते हैं।
मटिहानी का लक्ष्मी नारायण मंदिर
यह स्थान भी रामायण काल से सीधा जुड़ा है। पौराणिक मान्यताओं के अनुसार, माता सीता के विवाह के समय मटकोर की रस्म के लिए मिट्टी इसी स्थान से ली गई थी। यहाँ स्थित लक्ष्मी नारायण मंदिर की पवित्रता और ऐतिहासिक महत्व के कारण यहाँ भक्तों की भारी भीड़ रहती है।
कल्याणी देवी स्थान
सिद्ध पीठ के रूप में विख्यात कल्याणी देवी स्थान इस क्षेत्र के अत्यंत पूजनीय स्थलों में से एक है। रामायण काल से जुड़े इस पवित्र स्थल पर पूरे वर्ष श्रद्धालुओं का आना-जाना लगा रहता है। भक्तों का विश्वास है कि माता कल्याणी के दरबार में आने से मन को शांति मिलती है और मनोकामनाएं पूर्ण होती हैं।
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