एयरलाइंस की मनमानी पर आयोग का सख्त रुख
रायपुर जिला उपभोक्ता विवाद प्रतितोष आयोग ने विस्तारा एयरलाइंस के खिलाफ एक कड़ा फैसला सुनाते हुए यात्री को मानसिक और शारीरिक परेशानी के लिए 1 लाख रुपये का मुआवजा देने का आदेश दिया है। इसके अतिरिक्त, एयरलाइंस को 10 हजार रुपये मुकदमा खर्च के रूप में भी भुगतान करने होंगे। यह मामला तब सामने आया जब एक कन्फर्म टिकट होने के बावजूद यात्री को विमान में सवार होने से रोक दिया गया था।
क्या था पूरा मामला
पीड़ित यात्री कांकेर में तैनात अतिरिक्त जिला एवं सत्र न्यायाधीश (एडीजे) भूपेंद्र कुमार वासनीकर हैं। मई 2023 में वे अपने परिवार के साथ कश्मीर की यात्रा पर गए थे। 28 मई को उन्हें अपनी पत्नी और दो बच्चों के साथ दिल्ली से रायपुर की वापसी करनी थी, जिसके लिए उनके पास विस्तारा एयरलाइंस की कन्फर्म टिकट मौजूद थी। उड़ान से एक घंटा पहले एयरलाइंस के कर्मचारियों ने ओवरबुकिंग का हवाला देते हुए उन्हें बोर्डिंग से मना कर दिया।
परिवार को हुई परेशानी
विस्तारा एयरलाइंस ने अंततः परिवार के तीन सदस्यों को यात्रा की अनुमति दे दी, लेकिन भूपेंद्र कुमार वासनीकर को दिल्ली में ही रुकना पड़ा। मजबूरन उन्हें अगले दिन 18,823 रुपये खर्च करके इंडिगो एयरलाइंस की नई टिकट खरीदनी पड़ी। इस मामले में एयरलाइंस ने दलील दी कि विमानन क्षेत्र में ओवरबुकिंग एक सामान्य प्रक्रिया है और वे यात्री को टिकट का चार गुना मुआवजा पहले ही दे चुके हैं।
आयोग ने सुनाया फैसला
आयोग के अध्यक्ष प्रशांत कुंडू और सदस्य डॉ. आनंद वर्गीस ने एयरलाइंस के तर्कों को सिरे से खारिज कर दिया। आयोग ने स्पष्ट किया कि कन्फर्म टिकट होने के बाद भी यात्री को उड़ान से वंचित करना अनुचित व्यापार व्यवहार है। आयोग ने एयरलाइंस को 45 दिनों के भीतर कुल राशि का भुगतान करने का निर्देश दिया है। यदि कंपनी इस समय सीमा में विफल रहती है, तो उन्हें उक्त राशि पर 7% वार्षिक ब्याज भी देना होगा।
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