महिलाओं की आर्थिक मजबूती के लिए नई पहल
कृषि और पशुपालन के क्षेत्र में भारतीय महिलाओं का योगदान अत्यंत महत्वपूर्ण है। धान की रोपाई से लेकर कटाई तक के कामों में महिलाओं की भूमिका को नजरअंदाज नहीं किया जा सकता है। इसी को ध्यान में रखते हुए मध्य प्रदेश सरकार के पशुपालन एवं डेयरी विभाग ने लखपति गौ-पालक दीदी नामक एक महत्वाकांक्षी योजना की शुरुआत की है। इस योजना का मुख्य उद्देश्य राज्य में दुग्ध उत्पादन को दोगुना करना और महिलाओं को आत्मनिर्भर बनाना है।
क्या है यह योजना और कैसे होगा लाभ
यह योजना शून्य पूंजीगत निवेश पर आधारित है। इसके तहत सामान्य गाय और भैंसों में उन्नत नस्ल के वीर्य का उपयोग करके कृत्रिम गर्भाधान कराया जाता है, जिससे उच्च नस्ल की बछिया और पड़िया तैयार होती हैं। पशु चिकित्सकों के अनुसार, उन्नत नस्ल के पशुओं से दूध उत्पादन में ढाई गुना तक की वृद्धि हो सकती है।
लाखों की कमाई का गणित
बालाघाट के पशु चिकित्सक पंकज पुसाम ने बताया कि एक उन्नत नस्ल की गाय या भैंस अपने जीवनकाल में पांच से 8 बार ब्याती है। इस पूरी प्रक्रिया के माध्यम से एक पशुपालक महिला आसानी से तीन से चार लाख रुपये तक की कमाई कर सकती है। यदि किसी के पास तीन से चार ऐसे उन्नत पशु उपलब्ध हों, तो उनकी कुल आय 10 लाख रुपये से भी अधिक हो सकती है।
बालाघाट का प्रदर्शन
कृत्रिम गर्भाधान के मामले में बालाघाट जिले ने पूरे मध्य प्रदेश में बाजी मारी है। जिले ने अवर्णित पशुओं में 58 प्रतिशत कृत्रिम गर्भाधान की उपलब्धि हासिल कर पहला स्थान प्राप्त किया है। इसके अतिरिक्त जिले में अन्य प्रमुख आंकड़े इस प्रकार हैं:
- कुल कृत्रिम गर्भाधान में 67 प्रतिशत उपलब्धि हासिल की।
- अक्रियाशील मैत्री गौ सेवकों से 66 कीटों की वापसी कराई।
- 1756 सेक्स सॉर्टेड सीमन स्ट्रॉ का सफल उपयोग किया।
- AVFO द्वारा 96 कृत्रिम गर्भाधान किए गए।
- क्षीरधारा ग्रामों में 277 शिविरों का सफल आयोजन किया गया।
- एफएमडी टीकाकरण अभियान के सातवें चरण में 67.51 प्रतिशत टीकाकरण का लक्ष्य पूरा किया गया।
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