राजस्थान में पौधारोपण अभियानों की आड़ में हुए कथित घोटाले की पड़ताल अब और तेज हो गई है। आरोप है कि हरियाली बढ़ाने के नाम पर 100 करोड़ रुपए से अधिक की राशि का गबन किया गया, जबकि हकीकत में कई स्थानों पर एक भी पौधा नहीं लगाया गया।
कागजों पर लगे पौधे, असल में जमीन खाली
जांच के दौरान सामने आया है कि प्रदेश में कई जगहों पर पौधे लगाए बिना ही भुगतान उठा लिया गया। यानी फाइलों और रिकॉर्ड में तो हरियाली दर्ज कर दी गई, मगर मौके पर स्थिति इसके बिल्कुल उलट निकली।
उच्चस्तरीय टीम कर रही पड़ताल
इस पूरे मामले की जांच अतिरिक्त प्रधान मुख्य वन संरक्षक उदयशंकर के नेतृत्व में गठित टीम कर रही है। टीम सरकारी रिकॉर्ड और जमीनी हालात का आपस में मिलान कर रही है, ताकि यह पता लगाया जा सके कि कागजों में दर्ज आंकड़ों और वास्तविक स्थिति के बीच कितना अंतर है।
अधिकारियों और कर्मचारियों पर कार्रवाई
अब तक इस गड़बड़ी में संलिप्त पाए गए कई अधिकारियों और कर्मचारियों के खिलाफ कार्रवाई की जा चुकी है। जांच आगे बढ़ने के साथ और भी लोगों की भूमिका सामने आने की आशंका जताई जा रही है।
अलवर मामले की सीबीआई जांच की सिफारिश
अलवर में सामने आए 18 करोड़ रुपए के मामले को गंभीर मानते हुए इसकी सीबीआई जांच की सिफारिश की गई है। इस मामले को घोटाले की कड़ी का एक अहम हिस्सा माना जा रहा है।
अब हर पौधे की डिजिटल निगरानी
भविष्य में इस तरह की गड़बड़ियों को रोकने के लिए सरकार ने सख्ती बरतते हुए हर पौधे की जियो-टैगिंग और डिजिटल मॉनिटरिंग को अनिवार्य कर दिया है। इससे लगाए गए पौधों की वास्तविक स्थिति पर सीधी नजर रखी जा सकेगी।
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