धान की नर्सरी में खरपतवार का संकट
खरीफ सीजन के दौरान धान की खेती में नर्सरी तैयार करना सबसे महत्वपूर्ण चरण माना जाता है। स्वस्थ नर्सरी ही आने वाले समय में अच्छी पैदावार की गारंटी देती है। हालांकि, नर्सरी में पनपने वाले खरपतवार किसानों की मेहनत पर पानी फेर सकते हैं। ये खरपतवार मुख्य फसल के साथ पानी, पोषक तत्वों और जगह के लिए मुकाबला करते हैं, जिससे धान के नन्हे पौधे कमजोर पड़ जाते हैं और उनकी वृद्धि रुक जाती है।
खरपतवार नियंत्रण के प्रभावी उपाय
गोंडा के प्रगतिशील किसान हरिओम मिश्रा के अनुसार, यदि नर्सरी में खरपतवार पर समय रहते नियंत्रण नहीं पाया गया, तो ये तेजी से फैलते हैं। इन समस्याओं से निपटने के लिए किसान निम्नलिखित सुझावों पर अमल कर सकते हैं:
- नियमित निगरानी: नर्सरी का हर रोज निरीक्षण करें। जैसे ही खरपतवार नजर आएं, उन्हें शुरुआती अवस्था में ही उखाड़ देना चाहिए। छोटे खरपतवारों को हाथ से निकालना बेहद आसान होता है।
- पानी का सही प्रबंधन: नर्सरी में पानी का स्तर संतुलित रखें। पानी की अधिकता या कमी खरपतवारों के पनपने के लिए अनुकूल स्थिति पैदा करती है।
- विशेषज्ञ की सलाह: यदि खरपतवार बहुत अधिक फैल गए हों, तो केवल कृषि विशेषज्ञों की राय के बाद ही उचित खरपतवार नाशक दवाओं का प्रयोग करें।
मजबूत पौध और बेहतर पैदावार का महत्व
हरिओम मिश्रा का कहना है कि एक बार जब खरपतवार खेत में पैर पसार लेते हैं, तो धान के पौधों को पर्याप्त पोषण नहीं मिल पाता। इसका बुरा असर बाद में खेत में रोपाई के समय भी देखने को मिलता है। एक मजबूत और हरी-भरी नर्सरी तैयार करने के लिए साफ खेत का चयन, उच्च गुणवत्ता वाले बीजों का उपयोग और नियमित देखभाल बहुत आवश्यक है। यदि किसान शुरुआत से ही सचेत रहें, तो रोपाई के बाद धान के पौधे तेजी से विकसित होते हैं और अंत में किसानों को बंपर पैदावार प्राप्त होती है।
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