न्याय की उम्मीद में बदला पाला
धाराशिव से सांसद ओमराजे निंबालकर ने शिवसेना यूबीटी को छोड़कर मुख्यमंत्री एकनाथ शिंदे के खेमे में शामिल होने के अपने फैसले के पीछे एक भावनात्मक कारण बताया है। उन्होंने खुलासा किया कि इस बड़े कदम के पीछे मुख्य वजह उनके पिता पवनराजे निंबालकर से जुड़ा कानूनी मामला है। सांसद ने दावा किया है कि उन्हें उप मुख्यमंत्री एकनाथ शिंदे और केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह की ओर से आश्वासन मिला है कि उनके पिता के मामले में हाईकोर्ट के फैसले को सीबीआई चुनौती देगी। उन्हें पूरी उम्मीद है कि इस तरह उन्हें न्याय मिल सकेगा।
आर्थिक आरोपों पर दी सफाई
पैसे लेने और गद्दारी के लग रहे आरोपों को खारिज करते हुए उन्होंने कहा कि यदि उनका उद्देश्य केवल धन कमाना होता, तो वह 2022 में ही दल बदल चुके होते। उन्होंने कहा कि वह चार साल तक इंतजार करने वाले व्यक्ति नहीं हैं। निंबालकर ने जोर देकर कहा कि सत्ता पक्ष के साथ जाने का उनका फैसला पूरी तरह से अपने संसदीय क्षेत्र में विकास कार्यों को गति देने के लिए लिया गया है।
सांसद निधि और विकास का दावा
सांसद निधि के उपयोग को लेकर उन्होंने स्पष्ट किया कि 2019 से 2024 के अपने कार्यकाल के दौरान उन्हें आवंटित 25 करोड़ रुपये की राशि का उन्होंने 100 प्रतिशत उपयोग किया है। उन्होंने बताया कि उनके क्षेत्र की आवश्यकताएं बहुत अधिक हैं और सीमित बजट के कारण केवल सांसद निधि से हर गांव और बूथ तक विकास पहुंचाना चुनौतीपूर्ण है। इसीलिए कार्यकर्ताओं और समर्थकों से चर्चा के बाद उन्होंने सत्ता पक्ष के साथ मिलकर काम करने का निर्णय लिया।
शिंदे गुट में शामिल हुए 6 सांसद
उल्लेखनीय है कि शिवसेना यूबीटी से नाता तोड़ने वाले 6 सांसदों ने एकनाथ शिंदे की शिवसेना का दामन थाम लिया है। इन नेताओं में संजय हरिभाऊ जाधव, भाऊसाहेब राजाराम वाकचौरे, ओमप्रकाश भूपालसिंह निंबालकर, संजय दीना पाटिल, संजय उत्तमराव देशमुख और नागेश बापुराव पाटिल अष्टिकर शामिल हैं। मुख्यमंत्री एकनाथ शिंदे ने 22 जून को एक बयान में इन सभी के शामिल होने की आधिकारिक पुष्टि की थी।
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