दर्शक और उनकी मेहनत की कमाई को दिया सम्मान
नब्बे के दशक की सुपरहिट फिल्म आशिकी से बॉलीवुड में अपनी अलग पहचान बनाने वालीं अनु अग्रवाल ने हाल ही में अपने फिल्मी सफर को लेकर एक बड़ा खुलासा किया है। सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म इंस्टाग्राम पर एक लंबी पोस्ट के जरिए उन्होंने बताया कि अपने करियर के दौरान उन्होंने कई बड़ी फिल्मों के प्रस्तावों को क्यों ठुकरा दिया था।
दर्शकों की सुविधा का रखती थीं ख्याल
अनु ने अपनी एक तस्वीर साझा करते हुए लिखा कि एक कलाकार के तौर पर उनके मन में हमेशा एक बात खटकती थी कि लोग उनकी फिल्म देखने के लिए अपनी गाढ़ी कमाई खर्च करते हैं। उन्होंने कहा, मिडिल-क्लास और लोअर-मिडिल-क्लास के कई दर्शक ऐसे होते हैं जो बड़ी मुश्किल से पैसे जोड़कर टिकट खरीदते हैं या फिर सिनेमाघर तक पहुंचने के लिए अपनी सुविधा से बाहर निकलकर संघर्ष करते हैं। यही बात उन्हें सोचने पर मजबूर करती थी कि क्या वह दर्शकों को उनके पैसे के बदले में कुछ सार्थक दे पा रही हैं या नहीं।
फिल्मों के चयन का अनोखा मापदंड
अनु अग्रवाल ने आगे स्पष्ट किया कि केवल फिल्म का सफल होना ही उनके लिए एकमात्र पैमाना नहीं था। उनके अनुसार, किसी भी फिल्म को साइन करने से पहले वह यह देखती थीं कि क्या वह कहानी दर्शकों के लिए वास्तव में सही है। इसी सोच के चलते उन्होंने कई ऐसी कहानियों और फिल्मों को करने से मना कर दिया, जो उन्हें दर्शकों के नजरिए से सही नहीं लगीं।
कलाकार की जिम्मेदारी
अपनी पोस्ट में अनु ने यह भी लिखा कि यह मामला सिर्फ खुद को टाइपकास्ट होने से बचाने या सही किरदारों के चुनाव तक सीमित नहीं था। वह मानती थीं कि सिनेमाघरों में बैठे दर्शकों के प्रति उनकी एक नैतिक जिम्मेदारी है। उन्होंने कहा कि दर्शकों ने उन्हें अपार प्यार और सम्मान दिया है, इसलिए उनका सबसे छोटा फर्ज यही था कि वह दर्शकों के समय, उनके ध्यान और भरोसे का पूरा सम्मान करें। यही सिद्धांत उनके करियर का आधार रहा और इसी कारण उन्होंने कई बड़े प्रोजेक्ट्स से दूरी बनाए रखना ही उचित समझा।
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