जामताड़ा: इलाज का केंद्र बना शराबियों का अड्डा, चार साल से बंद है हेल्थ एंड वेलनेस सेंटर

झारखंड के जामताड़ा जिले में करोड़ों की लागत से बना हेल्थ एंड वेलनेस सेंटर चार साल से बंद है, जिससे नाराज ग्रामीणों ने इसे असामाजिक तत्वों का ठिकाना करार दिया है।

चार साल से ताले में कैद स्वास्थ्य सुविधाएं

झारखंड के जामताड़ा जिले के नारायणपुर प्रखंड में स्थित मुरली पहाड़ी हेल्थ एंड वेलनेस सेंटर इन दिनों चर्चा का विषय बना हुआ है। ग्रामीणों का आरोप है कि करोड़ों रुपये खर्च कर जिस भवन का निर्माण मरीजों के इलाज के लिए किया गया था, वह पिछले चार वर्षों से प्रभावी रूप से संचालित नहीं हो रहा है। अस्पताल की इमारत बनकर तैयार है और इसमें कंप्यूटर, पीसी सेटअप तथा इनवर्टर जैसे आधुनिक उपकरण भी मौजूद हैं, लेकिन मुख्य भवन पर सालों से ताला लगा हुआ है।

इलाज की जगह बन गया शराबियों का ठिकाना

स्वास्थ्य केंद्र के बंद रहने के कारण अब यह परिसर उपेक्षित पड़ा है। स्थानीय निवासियों का कहना है कि शाम ढलते ही यहां असामाजिक तत्वों और शराबियों का जमावड़ा शुरू हो जाता है। अस्पताल परिसर में हो रही ऐसी गतिविधियों से आसपास के लोगों में डर और असुरक्षा का माहौल है। ग्रामीणों ने प्रशासन से इस पर तुरंत रोक लगाने की मांग की है।

स्वास्थ्य सेवाओं के लिए दर-दर भटकने को मजबूर लोग

केंद्र के नियमित रूप से काम न करने का सीधा असर मुरली पहाड़ी और उसके आसपास के गांवों के लोगों पर पड़ रहा है। छोटी बीमारियों के लिए भी लोगों को इलाज हेतु जामताड़ा या धनबाद जैसे दूर के अस्पतालों का रुख करना पड़ता है। आपातकाल की स्थिति में लंबी दूरी तय करने के कारण मरीजों की जान पर जोखिम बना रहता है और परिजनों को आर्थिक तंगी का भी सामना करना पड़ता है।

स्वास्थ्य मंत्री के क्षेत्र में बदहाल व्यवस्था

यह मामला इसलिए भी चर्चा में है क्योंकि जामताड़ा विधानसभा क्षेत्र का प्रतिनिधित्व डॉ. इरफान अंसारी कर रहे हैं, जो वर्तमान में झारखंड सरकार में स्वास्थ्य, चिकित्सा शिक्षा एवं परिवार कल्याण मंत्री हैं। अपने ही विधानसभा क्षेत्र में सरकारी स्वास्थ्य केंद्र की ऐसी दुर्दशा पर अब सवाल उठने लगे हैं।

प्रशासन ने क्या कहा

इस पूरे मामले पर सिविल सर्जन डॉ. शिव प्रसाद मिश्रा ने सफाई दी है। उन्होंने केंद्र के पूरी तरह से बंद होने की बात को नकारा है। उनका कहना है कि मुरली पहाड़ी केंद्र में एएनएम और अन्य स्वास्थ्यकर्मी तैनात हैं और वे वहीं रहकर सेवाएं दे रहे हैं। हालांकि, उन्होंने यह स्वीकार किया कि डॉक्टरों की कमी है। सिविल सर्जन ने आश्वासन दिया है कि राज्य स्तर से डॉक्टरों की नियुक्ति होते ही स्वास्थ्य सेवाओं को और दुरुस्त कर दिया जाएगा।

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