क्या था पूरा मामला
हिमाचल प्रदेश के शिमला जिले के अंतर्गत आने वाले रोहड़ू के शलाश डोगरी गांव में हुई 77 वर्षीय गीता देवी की हत्या ने पूरे इलाके को दहला दिया था। 16 जून 2026 को बुजुर्ग महिला अपने घर में मृत पाई गई थीं। पुलिस के लिए यह एक ब्लाइंड मर्डर केस था, क्योंकि मौके पर कोई चश्मदीद नहीं था और न ही आसपास के इलाकों में सीसीटीवी कैमरों की कवरेज मौजूद थी।
पुलिस की चुनौती और जांच
घटना की सूचना मिलते ही पुलिस ने मामला दर्ज किया और जांच शुरू की। पुलिस थाना रोहड़ू में 17 जून 2026 को अभियोग संख्या 61/2026 के तहत भारतीय न्याय संहिता (बीएनएस) की धाराओं में केस दर्ज किया गया। जांच को पुख्ता करने के लिए फॉरेंसिक विशेषज्ञों की मदद ली गई और वैज्ञानिक तरीके से सबूत जुटाए गए। शिमला की एएसपी महर पंवर के मुताबिक, पुलिस ने इस मामले में तकनीकी संसाधनों, मोबाइल टावर डम्प डाटा और मानव स्रोतों का बेहतरीन तालमेल बिठाकर आरोपियों तक पहुंचने की रणनीति अपनाई।
कैसे पकड़े गए आरोपी
लगातार सात दिनों की कड़ी मशक्कत और तकनीकी विश्लेषण के बाद पुलिस ने 22 जून 2026 को तीन आरोपियों को दबोच लिया। गिरफ्तार किए गए लोगों की पहचान 28 वर्षीय लाल बहादुर उर्फ लालू, 19 वर्षीय नवीन और 20 वर्षीय संतोष के रूप में हुई है। ये तीनों मूल रूप से नेपाल के निवासी हैं और शिमला जिले के अलग-अलग इलाकों में रह रहे थे।
लूट के इरादे से दिया वारदात को अंजाम
पूछताछ में आरोपियों ने अपना जुर्म कबूल कर लिया है। उन्होंने बताया कि वे लूटपाट करने के इरादे से महिला के घर में घुसे थे और इसी दौरान उन्होंने गीता देवी की हत्या कर दी। पुलिस ने आरोपियों की निशानदेही पर हत्या में इस्तेमाल किया गया एक डंडा भी बरामद कर लिया है। फिलहाल पुलिस टीम मामले से जुड़े अन्य पहलुओं की गहनता से जांच कर रही है और आगे की कानूनी प्रक्रिया जारी है।
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