सुरक्षा के नाम पर बड़ा खिलवाड़
लखनऊ में हुई भीषण अग्निकांड की घटना के बाद देशभर में कोचिंग संस्थानों की सुरक्षा व्यवस्था पर बहस छिड़ गई है। इसी कड़ी में शिक्षा का हब कहे जाने वाले इंदौर की हकीकत सामने आई है। इंदौर के भंवरकुआं इलाके में स्थित वेदा बिजनेस पार्क में 50 से ज्यादा कोचिंग सेंटर चल रहे हैं, जहां रोजाना हजारों छात्र पढ़ाई करने आते हैं। एक ग्राउंड रिपोर्ट में खुलासा हुआ है कि यहां की इमारतें किसी भी समय बड़े हादसे का शिकार हो सकती हैं।
निकलने का सिर्फ एक रास्ता
इमारत की बनावट बेहद खतरनाक है। इसके निचले हिस्से में फूड कैफे और रेस्टोरेंट चल रहे हैं, जबकि ऊपर की तीन मंजिलों पर कोचिंग सेंटर संचालित हैं। हैरानी की बात यह है कि इतनी भीड़भाड़ वाली जगह पर आग लगने की स्थिति में बाहर निकलने के लिए केवल एक ही रास्ता है। नियमों के अनुसार, ऐसी बहुमंजिला इमारतों में इमरजेंसी एग्जिट या फायर एस्केप होना अनिवार्य है, लेकिन यहाँ ऐसी कोई भी व्यवस्था मौजूद नहीं है।
ज्वलनशील कचरा और बिजली के तारों का मकड़जाल
पड़ताल के दौरान इमारत के भीतर और पीछे के हिस्से में बिजली के तारों का खतरनाक जाल बिछा हुआ मिला। खुले तार किसी भी वक्त शॉर्ट सर्किट की वजह बन सकते हैं। इसके अलावा:
- इमारत के चारों तरफ गंदगी और ज्वलनशील कचरे के ढेर मिले हैं।
- बेसमेंट में कचरा जलाने के निशान भी देखे गए हैं, जो आग को सीधे न्योता दे रहे हैं।
- फायर एक्सटिंग्विशर केवल दिखावे के लिए टांग दिए गए हैं।
- स्मोक डिटेक्टर, फायर अलार्म और स्प्रिंकलर सिस्टम जैसे आधुनिक सुरक्षा इंतजाम नदारद हैं।
- रेत की बाल्टियां सुरक्षा की जगह डस्टबिन के रूप में उपयोग हो रही हैं।
जिम्मेदार कौन?
इतना ही नहीं, इस इमारत की छत पर एक ऐसा कोचिंग सेंटर भी चल रहा है, जिसे स्थानीय लोग अवैध बता रहे हैं। वहां भी बड़ी संख्या में छात्र अपनी पढ़ाई के लिए आते हैं। सबसे बड़ा सवाल यही है कि अगर यहां अचानक आग लग जाए, तो हजारों छात्रों को सुरक्षित बाहर निकालने की कोई ठोस योजना क्यों नहीं है? प्रशासन और बिल्डिंग संचालकों की यह लापरवाही किसी भी दिन बड़े हादसे का सबब बन सकती है।
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