सांपों से बचाव का पारंपरिक तरीका
छत्तीसगढ़ के सरगुजा जिले के ग्रामीण अंचलों में आज भी लोग अपनी पुरानी मान्यताओं और परंपराओं को बखूबी निभा रहे हैं। बरसात के मौसम में जब सांपों के घरों में घुसने का डर बढ़ जाता है, तो ग्रामीण अपने घरों को सुरक्षित रखने के लिए दरवाजे की चौखट पर नागफनी का पौधा लगाते हैं। स्थानीय लोगों का अटूट विश्वास है कि इस पौधे के प्रभाव से सांप घर के आसपास भी भटकने की हिम्मत नहीं करते हैं।
बरसात में बढ़ जाता है खतरा
स्थानीय निवासी सिकंदर प्रजापति के अनुसार, वर्षा ऋतु में मिट्टी में नमी और भाप की अधिकता होने के कारण सांप अपने बिलों से बाहर निकल आते हैं। ऐसे में उनके रिहायशी इलाकों में घुसने की संभावना काफी बढ़ जाती है। ग्रामीण बड़े-बुजुर्गों से मिली सीख को अपनाते हुए वर्षों से नागफनी का उपयोग सुरक्षा कवच के रूप में करते आ रहे हैं। यदि घर में लगा पुराना पौधा सूख जाता है, तो उसकी जगह तुरंत नया पौधा रोप दिया जाता है ताकि सुरक्षा घेरा बना रहे।
करैत सांप का है सबसे ज्यादा डर
इस क्षेत्र में करैत सांप का खतरा सबसे अधिक रहता है। इसे अत्यधिक जहरीला माना जाता है और इसके काटने पर जीवन के लिए बड़ा संकट पैदा हो जाता है। यही मुख्य कारण है कि गांव के लोग सांपों से बचाव के लिए पारंपरिक उपायों पर आज भी भरोसा करते हैं।
पौधा लगाने की सरल विधि
नागफनी के पौधे को घर में लगाना बेहद आसान है। इसे बाजार से खरीदकर या जड़ों सहित कहीं से लाकर आसानी से गमले में उगाया जा सकता है। एक बार विकसित हो जाने पर, इसे घर के मुख्य दरवाजे पर या फिर चारों कोनों में रोप दिया जाता है। ग्रामीण संस्कृति में नागफनी केवल एक वनस्पति नहीं है, बल्कि यह लोक विश्वास का एक अटूट हिस्सा है जिसे आज की पीढ़ी भी पूरी श्रद्धा के साथ आगे बढ़ा रही है।
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