सांची दुग्ध समिति: गांव में अपना डेयरी कारोबार कैसे शुरू करें, जानें पूरी प्रक्रिया और कमाई का गणित

मध्य प्रदेश के गांवों में सांची दुग्ध समिति खोलकर किसान नियमित आय कमा सकते हैं। जानिए इसे शुरू करने के लिए जरूरी शर्तें, पंजीकरण प्रक्रिया और इससे मिलने वाले लाभ।

गांव में सांची समिति खोलने की पूरी प्रक्रिया

अगर आप ग्रामीण इलाके में रहते हैं और एक ऐसा कारोबार तलाश रहे हैं जो आपको हर रोज कमाई का जरिया दे सके, तो सांची दुग्ध समिति एक बेहतरीन विकल्प है। इससे न केवल किसानों को अपने घर के पास दूध बेचने की सुविधा मिलती है, बल्कि शहर तक दूध पहुंचाने का खर्च और समय भी बचता है।

समिति खोलने की पात्रता और सर्वे

सांची दुग्ध समिति शुरू करने के लिए सबसे पहले दुग्ध संघ को आवेदन देना पड़ता है। आवेदन मिलने के बाद दुग्ध संघ की एक टीम गांव में आकर सर्वे करती है। इस दौरान मुख्य रूप से दो बातों पर गौर किया जाता है: गांव में दुधारू पशुओं की कुल संख्या कितनी है और वहां कितना अतिरिक्त दूध उपलब्ध है। यदि गांव में रोजाना कम से कम 100 लीटर अतिरिक्त दूध की उपलब्धता सुनिश्चित हो जाती है, तो वहां समिति खोलने की प्रक्रिया आगे बढ़ाई जाती है। इसके बाद गांव के सरपंच और ग्रामीणों की मौजूदगी में एक विस्तार बैठक का आयोजन किया जाता है।

गठन के लिए जरूरी नियम

समिति के सुचारू संचालन के लिए कुछ महत्वपूर्ण नियमों का पालन करना होता है:

  • समिति में कम से कम 25 सक्रिय सदस्य होने चाहिए।
  • 10 सदस्यीय एक प्रबंध कार्यकारिणी का गठन किया जाता है, जिसमें अध्यक्ष और उपाध्यक्ष का चुनाव होता है।
  • समिति के कामकाज और वित्तीय लेन-देन के लिए अध्यक्ष और सचिव के संयुक्त नाम से किसी राष्ट्रीयकृत या सहकारी बैंक में खाता खोला जाता है।
  • सचिव का काम हिसाब-किताब रखना होता है, जबकि टेस्टर की जिम्मेदारी दूध की गुणवत्ता और उसमें फैट की मात्रा की जांच करना है।

किसानों को होने वाले प्रमुख लाभ

सीधी जिले के गोपालपुर गांव के समिति अध्यक्ष परीक्षित सिंह के अनुसार, छोटे किसानों के लिए यह बहुत फायदेमंद है जो रोजाना सिर्फ 2 से 3 लीटर दूध निकालते हैं। सांची समिति के माध्यम से दूध बेचने के निम्नलिखित लाभ हैं:

  • दूध को शहर ले जाने की झंझट खत्म हो जाती है, क्योंकि सांची का वाहन रोजाना केंद्र से दूध लेकर प्लांट तक पहुंच जाता है।
  • दूध का भुगतान पूरी तरह से फैट की मात्रा पर आधारित होता है।
  • किसानों को साप्ताहिक या मासिक आधार पर सीधे उनके खातों में भुगतान मिल जाता है।
  • पशुपालन को बढ़ावा मिलता है और जैविक खाद के रूप में गोबर की उपलब्धता बढ़ती है।

कुल मिलाकर, सांची दुग्ध समिति ग्रामीण अर्थव्यवस्था को मजबूत बनाने और छोटे किसानों की नियमित आय सुनिश्चित करने का एक सशक्त माध्यम बन रही है।

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