धान की बंपर पैदावार के लिए अपनाएं यह खास तरीका, नर्सरी लगाने से पहले खेत की तैयारी ऐसे करें

मध्य प्रदेश के सीधी जिले में धान की खेती की तैयारी कर रहे किसानों के लिए कृषि विशेषज्ञों ने वैज्ञानिक तरीके बताए हैं। सही जुताई और समतलीकरण से न केवल उत्पादन बढ़ता है, बल्कि लागत में भी कमी आती है।

खेत की तैयारी से तय होगी सफलता

खरीफ सीजन की शुरुआत के साथ ही सीधी जिले में किसान धान की रोपाई की तैयारी में व्यस्त हो गए हैं। धान की फसल में अच्छी पैदावार पाने के लिए खेत की वैज्ञानिक तरीके से तैयारी करना सबसे महत्वपूर्ण कदम है। कृषि विशेषज्ञों के अनुसार, धान की गुणवत्ता और उत्पादन सीधे तौर पर खेती की शुरुआती प्रक्रियाओं पर निर्भर करते हैं। जिले में अधिकतर किसान बड़े पैमाने पर धान की खेती करते हैं और यदि सही तकनीकों को अपनाया जाए, तो पैदावार में काफी इजाफा हो सकता है।

जुताई का वैज्ञानिक तरीका

सीधी के कृषि विज्ञान केंद्र के प्रभारी वैज्ञानिक डॉ शैलेंद्र गौतम का सुझाव है कि धान की रोपाई से पहले खेत की गहरी जुताई करना अनिवार्य है। इसके बाद एक लेवलर का उपयोग करके खेत को पूरी तरह समतल करना चाहिए। समतल खेत में पानी का समान वितरण होता है, जो पौधों के स्वस्थ विकास के लिए आवश्यक है। जुताई के दौरान इन बातों का विशेष ध्यान रखें:

  • खेत में 3 से 4 इंच पानी भरें और उसे 3 से 4 घंटे के लिए छोड़ दें ताकि मिट्टी पूरी तरह नरम हो जाए।
  • मिट्टी को भुरभुरी बनाने के लिए रोटावेटर या हाइड्रोलिक डिस्क हैरो का उपयोग करें।
  • यदि पहली जुताई पूरब-पश्चिम दिशा में हुई हो, तो दूसरी जुताई उत्तर-दक्षिण दिशा में करना अधिक फायदेमंद होता है।

अत्यधिक पानी से बचें

विशेषज्ञों ने चेतावनी दी है कि किसान अक्सर खेत में जरूरत से ज्यादा पानी भर देते हैं, जो फसल के लिए नुकसानदायक हो सकता है। खेत में केवल 3 से 4 इंच पानी ही पर्याप्त होता है। अधिक पानी होने की स्थिति में जुताई ठीक से नहीं हो पाती और मिट्टी के ढेले नहीं टूटते, जिससे पौधों की जड़ें कमजोर रह जाती हैं।

खेत तैयार करने के मुख्य लाभ

किसान सलाहकार मनसुख लाल कुशवाहा के अनुसार, सही तरीके से खेत तैयार करने से खेती से जुड़ी कई समस्याओं का समाधान हो जाता है। इसके प्रमुख लाभ इस प्रकार हैं:

  • मिट्टी में ऑक्सीजन का स्तर बना रहता है।
  • खरपतवार के उगने की संभावना काफी कम हो जाती है।
  • पौधों की जड़ें मजबूत होती हैं, जिससे उपज बेहतर मिलती है।
  • दवाओं और सिंचाई के पानी की खपत में कमी आती है, जिससे लागत घटती है।

वर्तमान मौसम धान की रोपाई के लिए बेहद अनुकूल है। यदि किसान इन वैज्ञानिक मानकों का पालन करते हैं, तो उन्हें धान की शानदार फसल प्राप्त हो सकती है और उनका मुनाफा भी बढ़ सकता है।

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