सरकार और यूनियन के बीच वार्ता विफल
हिमाचल प्रदेश में एचआरटीसी कर्मचारियों और राज्य सरकार के बीच लंबे समय से चल रहा गतिरोध अब सड़क पर उतरने की कगार पर है। परिवहन निगम के कर्मचारियों द्वारा की गई हड़ताल की चेतावनी के बाद शिमला में हुई बैठक बिना किसी नतीजे के समाप्त हो गई। इसका सीधा असर प्रदेश की जनता पर पड़ने वाला है, क्योंकि 24 जून की रात 12 बजे से राज्य में बस सेवाएं पूरी तरह ठप हो जाएंगी।
क्या है मुख्य विवाद और मांगें
कर्मचारी यूनियन की मुख्य मांग 100 करोड़ रुपये के लंबित भत्तों का भुगतान करना है। यूनियन ने पहले ही स्पष्ट कर दिया था कि यदि 24 जून तक इन मांगों पर कोई ठोस निर्णय नहीं लिया गया, तो वे काम बंद कर देंगे। एचआरटीसी कर्मचारी यूनियन के अध्यक्ष मान सिंह ने इस स्थिति के लिए सरकार के रवैये को जिम्मेदार ठहराया है।
बैठक में क्या हुआ
बताया जा रहा है कि शिमला में परिवहन विभाग के एडिशनल चीफ सेक्रेटरी के साथ बैठक आयोजित की गई थी, लेकिन यह वार्ता सकारात्मक दिशा में नहीं बढ़ सकी। मान सिंह ने आरोप लगाया कि मीटिंग के दौरान उच्च अधिकारियों का व्यवहार ठीक नहीं था। उन्होंने बताया कि बैठक के बीच में ही उन्हें तबादले की बात पता चली और बातचीत का स्तर काफी निराशाजनक रहा। विभाग के अधिकारियों का कहना है कि वे टेबल पर तुरंत कोई आदेश जारी नहीं कर सकते।
आम जनता के लिए सलाह
यूनियन ने प्रदेश के लोगों से अपील की है कि वे 24 जून की रात के बाद के लिए बसों में बुकिंग न करें और बस स्टैंड पर बसों का इंतजार करने से बचें। निगम के करीब 12 हजार कर्मचारी अब एकजुट होकर अपनी मांगों के लिए संघर्ष करने की तैयारी कर रहे हैं और सरकार से समय रहते मामले का हल निकालने की उम्मीद कर रहे हैं।
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