भेड़ें चराने से फीफा वर्ल्ड कप के हीरो बनने तक, ऐसी है अलीरेजा बेइरानवांद के संघर्ष की दास्तान

फीफा विश्व कप 2026 में ईरान के गोलकीपर अलीरेजा बेइरानवांद ने अपने शानदार खेल से सबको हैरान कर दिया है। एक समय सड़कों पर कार धोने और मस्जिदों में सोने वाले अलीरेजा का सफर किसी फिल्म की कहानी से कम नहीं है।

फुटबॉल के मैदान में चट्टान बने अलीरेजा

फीफा विश्व कप 2026 में ईरान की टीम के गोलकीपर अलीरेजा बेइरानवांद ने बेल्जियम के खिलाफ मैच में अपने बेहतरीन खेल का प्रदर्शन किया। इस मुकाबले में अलीरेजा बेल्जियम के सामने एक अभेद्य दीवार बनकर खड़े रहे। उन्होंने मैच के दौरान बेल्जियम के 7 गोल के प्रयासों को विफल कर दिया। हालांकि, आज जिसे पूरी दुनिया ईरान का नायक मान रही है, उसके लिए इस मुकाम तक पहुंचना बिल्कुल भी आसान नहीं था।

भेड़ चराने से तेहरान तक का संघर्ष

अलीरेजा का बचपन बेहद चुनौतीपूर्ण परिस्थितियों में बीता। उनका परिवार एक खानाबदोश जीवन जीता था, जिसका कोई स्थाई ठिकाना नहीं था। अलीरेजा अपने परिवार के साथ भेड़ चराने का काम करते थे, लेकिन उनके भीतर एक फुटबॉलर बनने का जुनून था। उनके पिता को फुटबॉल से कोई लगाव नहीं था और जब उन्हें अलीरेजा के चोरी-छिपे फुटबॉल खेलने का पता चला, तो उन्होंने उनके ग्लव्स तक फाड़ दिए थे। परिवार की तंगहाली और पिता की नाराजगी के बावजूद अलीरेजा ने हार नहीं मानी। उन्होंने अपने चचेरे भाई से कुछ पैसे उधार लिए और एक रात घर से भागकर 600 किलोमीटर दूर तेहरान पहुंच गए।

सड़कों पर बीती रातें और कार धोने का काम

तेहरान में अलीरेजा के पास रहने का कोई ठिकाना नहीं था। उन्होंने कई रातें मस्जिदों और सड़कों पर बिताईं। एक बार जब वह एक क्लब के पास सो रहे थे, तो जागने पर उन्होंने अपने शरीर पर सिक्के बिखरे हुए पाए क्योंकि लोग उन्हें भिखारी समझ रहे थे। इस घटना ने उन्हें झकझोर दिया था। अपने खर्चों को पूरा करने के लिए उन्होंने कार धोने और पिज्जा शॉप में वेटर का काम भी किया। उनके लंबे कद के कारण कार वॉशिंग फर्म के मालिक उनसे काफी खुश रहते थे क्योंकि वे बड़ी एसयूवी गाड़ियां आसानी से धो लेते थे। बाद में, एक स्थानीय टीम के कोच की मदद से उनकी स्थिति में थोड़ा सुधार हुआ।

किस्मत का पलटना और राष्ट्रीय टीम में जगह

लगातार मेहनत और संघर्ष के बाद अलीरेजा की किस्मत तब बदली जब ‘नाफ्ता’ क्लब की नजर उन पर पड़ी। इसके बाद उन्होंने पीछे मुड़कर नहीं देखा। 2015 में उन्हें ईरान की सीनियर नेशनल टीम में शामिल किया गया। 2018 के विश्व कप में क्रिस्टियानो रोनाल्डो की पेनल्टी को रोककर उन्होंने दुनिया भर में सुर्खियां बटोरीं। इस सफलता के बाद, उनकी अपने पिता से सुलह हो गई। अलीरेजा के अनुसार, उनके पिता ने उनसे कहा कि उन्हें अपने बेटे पर गर्व है और शुरुआती दिनों में साथ न देने का उन्हें पछतावा है। आज अलीरेजा का संघर्ष उन सभी लोगों के लिए प्रेरणा है जो विपरीत परिस्थितियों में भी अपने सपनों को जीने की हिम्मत रखते हैं।

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