पलामू में जल संरक्षण की नई पहल
झारखंड के पलामू समेत राज्य के कई ऐसे इलाके हैं जो अब भी पूरी तरह से बारिश पर निर्भर हैं। यहां के किसान पारंपरिक तरीकों से खेती करते हैं, जिसमें पानी की बर्बादी अधिक होती है। घटते भूजल स्तर और सूखे की समस्या को देखते हुए अब आधुनिक सिंचाई तकनीकों को अपनाना अनिवार्य हो गया है। कृषि विशेषज्ञों का कहना है कि जल संकट से निपटने के लिए स्प्रिंकलर यानी फव्वारा सिंचाई विधि एक वरदान साबित हो सकती है।
स्प्रिंकलर सिंचाई के फायदे
जिला कृषि विज्ञान केंद्र, पलामू के विनोद पांडे के अनुसार, झारखंड की भौगोलिक स्थिति को देखते हुए यह तकनीक बेहद प्रभावी है। इसके प्रमुख लाभ निम्नलिखित हैं:
- 60 प्रतिशत पानी की बचत: यह प्रणाली पारंपरिक सिंचाई की तुलना में बहुत कम पानी खर्च करती है।
- समान सिंचाई: पाइप और नोजल के माध्यम से पानी का वितरण पूरे खेत में एक समान होता है, जिससे फसलों को सही मात्रा में नमी मिलती है।
- समय और श्रम की बचत: जहाँ पहले सिंचाई के लिए 3 से 4 मजदूरों की आवश्यकता होती थी, वहीं स्प्रिंकलर से लगभग आधे घंटे में 1 एकड़ भूमि की सिंचाई पूरी हो जाती है।
- फसलें: धान को छोड़कर लगभग सभी फसलों की सिंचाई के लिए इसका उपयोग किया जा सकता है।
किसानों के लिए 90 प्रतिशत अनुदान
सरकार आधुनिक खेती को बढ़ावा देने के लिए लगातार प्रयास कर रही है। स्प्रिंकलर सिंचाई प्रणाली लगाने पर किसानों को 90 प्रतिशत तक सब्सिडी का लाभ दिया जा रहा है। जिन किसानों के पास सिंचाई के स्रोत जैसे कुआं, तालाब, चेकडैम, आहर या बोरिंग उपलब्ध है, वे इस योजना का लाभ उठाने के पात्र हैं। इस योजना के बारे में विस्तार से जानने और आवेदन प्रक्रिया पूरी करने के लिए किसान अपने नजदीकी जिला कृषि कार्यालय में संपर्क कर सकते हैं। यह तकनीक न केवल खेती की लागत को कम करती है, बल्कि कम पानी में भी अधिक पैदावार लेने का अवसर प्रदान करती है।
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