मध्य प्रदेश का खरगोन जिला मिर्च उत्पादन के मामले में पूरे प्रदेश में अपनी अलग पहचान रखता है। यहां हर साल करीब 48 हजार हेक्टेयर क्षेत्र में किसान मिर्च की खेती करते हैं और इससे अच्छा मुनाफा कमाते हैं। खरीफ सीजन की शुरुआत होते ही जिले के किसान मिर्च की बुवाई की तैयारियों में जुट गए हैं। इसके साथ ही अब कई किसान एक ही खेत में दूसरी फसलें उगाकर अतिरिक्त कमाई का रास्ता भी अपना रहे हैं।
क्या है इंटरक्रॉपिंग और इसके फायदे
कृषि विशेषज्ञों का कहना है कि मिर्च के साथ इंटरक्रॉपिंग पद्धति अपनाना किसानों के लिए काफी लाभदायक साबित हो रहा है। इस तकनीक में किसान मुख्य फसल के साथ-साथ दूसरी फसलें भी उगाते हैं, जिससे खेत का बेहतर इस्तेमाल होता है और कम लागत में अधिक उत्पादन मिलने की संभावना बढ़ जाती है। इसके अलावा किसानों को एक से ज्यादा फसलों से आमदनी का मौका भी मिलता है।
विशेषज्ञ बताते हैं कि इंटरक्रॉपिंग से मुख्य फसल को कई तरह के रोगों और कीटों से सुरक्षा मिलती है। खेत में दूसरी फसल मौजूद होने पर कीटों का असर कम होता है और बीमारियां भी कम लगती हैं।
गेंदा और मक्का से अतिरिक्त आमदनी
खरगोन के उद्यानिकी वैज्ञानिक डॉ. एसके त्यागी के अनुसार, किसान मिर्च के साथ गेंदा फूल और मक्का की खेती करके अतिरिक्त कमाई कर सकते हैं। उन्होंने बताया कि बाजार में गेंदा फूल की मांग पूरे साल बनी रहती है। ऐसे में मिर्च के साथ फूलों की खेती किसानों के लिए फायदे का सौदा साबित हो सकती है।
इस तरह लगाएं अन्य फसलें
डॉ. त्यागी ने बताया कि किसान मिर्च की फसल के बीच मक्का या ज्वार भी लगा सकते हैं। इसके लिए वे मिर्च की 8 से 10 लाइन के बाद या फिर खेत के चारों ओर किनारों पर 3 से 4 लाइन मक्का या ज्वार लगाएं। इससे खेत को प्राकृतिक सुरक्षा मिलती है और मुख्य फसल का तेज हवा तथा कीटों से बचाव भी होता है।
उन्होंने किसानों को सलाह दी कि मिर्च की 16 लाइन के बाद गेंदा की एक लाइन जरूर लगाएं। गेंदा के पौधे खेत में कीट नियंत्रण में मदद करते हैं।
कीटों और रोगों से बचाव
विशेषज्ञों के अनुसार गेंदा खासतौर पर सफेद मक्खी जैसी समस्या को कम करने में काफी उपयोगी माना जाता है। इसके साथ ही त्योहार और शादी के सीजन में गेंदा फूल की अच्छी कीमत मिलने से किसानों को अतिरिक्त आमदनी भी हो जाती है।
कृषि विशेषज्ञ बताते हैं कि इंटरक्रॉपिंग से मिट्टी की गुणवत्ता भी बेहतर बनी रहती है। खेत में नमी लंबे समय तक टिकती है और उत्पादन क्षमता पर भी सकारात्मक असर पड़ता है, जिससे किसानों को कम लागत में ज्यादा फायदा मिल सकता है।
ध्यान रखने योग्य बातें
हालांकि कृषि वैज्ञानिकों का कहना है कि इंटरक्रॉपिंग अपनाने से पहले खेत की सही तैयारी, सिंचाई व्यवस्था और पौधों के बीच उचित दूरी का विशेष ध्यान रखना जरूरी है। तभी इस पद्धति का पूरा लाभ उठाया जा सकता है।
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