गर्मी के मौसम में अक्सर लोग ऐसे व्यंजनों की तलाश में रहते हैं जो स्वाद में लाजवाब होने के साथ-साथ सेहत के लिए भी फायदेमंद हों। छत्तीसगढ़ में मूली का पराठा सिर्फ सर्दियों तक सीमित नहीं रहता, बल्कि कई परिवार इसे गर्मियों में भी अपने नाश्ते में शामिल करते हैं। चावल का आटा, गेहूं का आटा, ताजी मूली और देसी मसालों के मेल से बनने वाला यह पराठा स्वाद और पोषण दोनों का बेहतरीन संगम है। खास बात यह है कि इसे तैयार करने में अधिक समय नहीं लगता और सुबह के नाश्ते के लिए यह एक भरपेट विकल्प माना जाता है।
चावल और गेहूं के आटे से बनता है खास मिश्रण
मूली का पराठा बनाने के लिए दो कप चावल का आटा और एक कप गेहूं का आटा लिया जाता है। दोनों को आपस में अच्छी तरह मिलाने के बाद इसमें टमाटर, हरी मिर्च, लहसुन, प्याज, मेथी पाउडर, नमक और जीरा पाउडर डाला जाता है। यही मिश्रण पराठे को उसका विशेष स्वाद देता है।
ताजी मूली से बढ़ता है स्वाद और पौष्टिकता
मसालों को मिला लेने के बाद इस मिश्रण में कद्दूकस की हुई ताजी मूली डाली जाती है। इसके बाद आवश्यकता के अनुसार पानी मिलाकर आटा गूंथ लिया जाता है। मूली में मौजूद पोषक तत्व इस व्यंजन को सेहत के लिहाज से भी लाभकारी बनाते हैं।
तवे पर सेंककर तैयार होती है स्वादिष्ट रोटी
आटा तैयार हो जाने के बाद तवे को गर्म किया जाता है। थोड़ा सा तेल डालकर आटे को रोटी के आकार में फैलाया जाता है और इसे दोनों तरफ से अच्छी तरह सेंका जाता है। कुछ ही मिनटों में स्वादिष्ट मूली का पराठा बनकर तैयार हो जाता है।
नाश्ते के लिए बेहतरीन विकल्प
गर्मियों में हल्के और पौष्टिक भोजन की मांग बढ़ जाती है। ऐसे में मूली के पराठे को चाय, दही या किसी हल्की सब्जी के साथ परोसा जा सकता है। स्वाद और पोषण से भरपूर यह पारंपरिक छत्तीसगढ़िया व्यंजन आज भी लोगों के बीच काफी लोकप्रिय बना हुआ है।
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