क्या सच में घास की रोटियां खा सकते हैं, जो महाराणा प्रताप से जुड़ी है?

इतिहास में महाराणा प्रताप द्वारा घास की रोटी खाने की कहानी काफी मशहूर है, लेकिन वैज्ञानिक और ऐतिहासिक दृष्टिकोण से इस दावे की सच्चाई क्या है, जानिए विस्तार से।

क्या घास से रोटी बनाना मुमकिन है

भारतीय इतिहास में महाराणा प्रताप के संघर्ष के दिनों की एक कहानी बेहद लोकप्रिय है, जिसमें कहा जाता है कि उन्होंने जंगल में घास की रोटियां खाकर गुजारा किया था। वैज्ञानिक दृष्टि से देखें तो इंसान सीधे हरी घास को नहीं पचा सकता क्योंकि हमारा पेट गाय या भैंस की तरह सेल्युलोज युक्त फाइबर को पचाने में सक्षम नहीं है। हालांकि, घास परिवार में गेहूं, चावल और मक्का जैसे अनाज भी आते हैं, जिन्हें हम आहार के रूप में इस्तेमाल करते हैं। प्राचीन काल में अकाल के दौरान लोग जंगली घासों के बीजों को इकट्ठा करके उनका आटा तैयार करते थे और उसी से रोटियां बनाते थे।

महाराणा प्रताप और घास की रोटी का सच

इतिहासकारों के बीच इस घटना की प्रमाणिकता को लेकर दो राय हैं। कवि कन्हैयालाल सेठिया की कविता पीथल और पाथल में इस घटना का भावुक चित्रण मिलता है, जिसमें महाराणा प्रताप की बेटी की भूख और उनसे जुड़ी घटना का जिक्र है। वहीं, आधुनिक इतिहासकार इसे पूरी तरह सत्य नहीं मानते। इसके प्रमुख कारण निम्नलिखित हैं:

  • अरावली के भील आदिवासी महाराणा प्रताप के साथ थे, जो फल, कंद-मूल और शिकार के जरिए भोजन जुटाने में कुशल थे।
  • महाराणा प्रताप छापामार युद्ध नीति अपना रहे थे, जिसके लिए उनके पास रसद पहुंचाने के गुप्त मार्ग मौजूद थे।
  • भामाशाह जैसे सहयोगियों से मिली आर्थिक मदद के कारण सेना और परिवार के लिए भोजन का प्रबंध होना संभव था।
  • उस कठिन दौर में महाराणा प्रताप की कोई छोटी बेटी नहीं थी, जिनके रोने की घटना का वर्णन कविता में मिलता है।

आज के समय में सुपरफूड है यह घास

व्यावहारिक रूप से जंगली घास के बीजों से रोटी बनाना बिल्कुल संभव है। बुंदेलखंड और मध्य प्रदेश के कुछ हिस्सों में आज भी फिकर नामक जंगली घास का उपयोग भोजन में किया जाता है। इसे अक्सर जंगली गेहूं भी कहा जाता है। आज यह पौधा एकसुपरफूड के रूप में उभरा है, जिसके कई स्वास्थ्य लाभ हैं:

  • पोषक तत्व: इसमें प्रोटीन, कैल्शियम, फाइबर, आयरन और एंटीऑक्सीडेंट भरपूर मात्रा में पाए जाते हैं।
  • स्वास्थ्य लाभ: यह पाचन सुधारने, वजन घटाने और हड्डियों को मजबूत बनाने में मददगार है।
  • डायबिटीज और कुपोषण: यह डायबिटीज के मरीजों और कुपोषण से निपटने के लिए बेहद फायदेमंद माना जाता है।
  • एनर्जी: इसके सेवन से शरीर को ऊर्जा मिलती है और यह ग्लूटेन मुक्त होने के कारण काफी लोकप्रिय हो रहा है।

अतः यह कहना गलत नहीं होगा कि संकट के समय जंगली घासों के बीजों का आटा बनाकर सेवन करना न केवल संभव है, बल्कि यह पोषक तत्वों से भरपूर एक बेहतरीन विकल्प भी है।

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