निर्जला एकादशी व्रत और जल का महत्व
निर्जला एकादशी के कठिन नियमों को लेकर श्रद्धालुओं के मन में अक्सर यह सवाल उठता है कि क्या इसमें पानी पीना पूरी तरह से मना है। शास्त्रों के अनुसार इस व्रत का पूर्ण पुण्य फल तभी मिलता है जब इसे बिना अन्न और जल के रखा जाए। पौराणिक कथाओं के मुताबिक भीमसेन ने भी निर्जला रहकर ही एकादशी का व्रत पूरा किया था, जिसके कारण इसे अत्यंत कठिन लेकिन शुभ माना जाता है। इस व्रत में एकादशी के सूर्योदय से लेकर द्वादशी के सूर्योदय तक जल की एक बूंद भी ग्रहण नहीं की जाती है।
क्या विशेष स्थिति में पानी पिया जा सकता है?
आज के दौर में बढ़ती भीषण गर्मी और गिरते स्वास्थ्य स्तर को देखते हुए हर किसी के लिए बिना जल का व्रत रखना चुनौतीपूर्ण हो सकता है। विद्वानों और पंडितों का मानना है कि कुछ विशेष परिस्थितियों में छूट ली जा सकती है:
- स्वास्थ्य संबंधी समस्या: यदि कोई व्यक्ति गंभीर रूप से बीमार है या बहुत अधिक बुजुर्ग है, तो वे स्वास्थ्य को प्राथमिकता देते हुए जल ग्रहण कर सकते हैं।
- आस्था और विकल्प: जो लोग पूरी तरह स्वस्थ हैं, उन्हें बिना जल के ही व्रत का संकल्प पूरा करना चाहिए। हालांकि, यदि कोई व्यक्ति अपनी गहरी आस्था के चलते व्रत रखना चाहता है, तो स्वास्थ्य बिगड़ने की स्थिति में वह पानी का सहारा ले सकता है।
- सावधानी: यदि शारीरिक स्थिति व्रत के कठोर नियमों को निभाने की अनुमति नहीं देती है, तो उपवास रखने से बचना ही बेहतर विकल्प है।
निर्जला एकादशी 2026 की महत्वपूर्ण तिथियां
निर्जला एकादशी का व्रत और मुहूर्त इस प्रकार है:
- तिथि की शुरुआत: 24 जून को शाम 06:12 बजे।
- तिथि की समाप्ति: 25 जून को रात 08:09 बजे।
- व्रत का दिन: उदया तिथि के अनुसार व्रत 25 जून को रखा जाएगा।
- पारण का समय: व्रत खोलने का समय 26 जून की सुबह 05:25 बजे से 08:13 बजे के बीच रहेगा।
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