पर्दे के पीछे की एक साल की तैयारी
महाराष्ट्र की राजनीति में शिवसेना यूबीटी के 6 सांसदों का एकनाथ शिंदे गुट में जाना उद्धव ठाकरे के लिए 2022 के बाद का सबसे बड़ा सियासी झटका माना जा रहा है। इस पूरी घटना के पीछे किसी अचानक लिए गए फैसले का हाथ नहीं है, बल्कि यह करीब एक साल से चल रही एक गुप्त योजना का परिणाम है। इसे राजनीतिक गलियारों में ऑपरेशन टाइगर का नाम दिया गया है।
गोपनीयता ही थी सबसे बड़ी ताकत
सूत्रों के अनुसार, इस पूरे मिशन की बागडोर शिवसेना सांसद श्रीकांत शिंदे के हाथों में थी। इस ऑपरेशन की सबसे बड़ी खासियत इसकी गोपनीयता रही। पूरी योजना की जानकारी केवल 4 से 5 लोगों को ही थी, जिनमें एकनाथ शिंदे और महाराष्ट्र सरकार के दो मंत्री भी शामिल थे। श्रीकांत शिंदे ने पिछले 6 से 8 महीनों में उन सभी असंतुष्ट सांसदों से संपर्क साधा जो पार्टी के नेतृत्व और दिशा से खुश नहीं थे।
दिल्ली में पूरा हुआ मिशन
इस ऑपरेशन का निर्णायक चरण दिल्ली में अंजाम दिया गया। घटनाक्रम के मुख्य बिंदु इस प्रकार हैं:
- 16 जून को 6 बागी सांसद निजी विमानों से दिल्ली पहुंचे और उन्हें नोएडा के एक होटल में रखा गया।
- 17 जून को श्रीकांत शिंदे और बागी सांसदों ने लोकसभा अध्यक्ष ओम बिरला से मुलाकात कर अपना समर्थन पत्र सौंपा।
- रविवार को उद्धव ठाकरे द्वारा बुलाई गई बैठक से पहले ही 5 सांसदों ने अपने हस्ताक्षर कर दिए थे, जिससे उद्धव खेमे को संभलने का मौका तक नहीं मिला।
सांसदों ने क्या दी दलील
पाला बदलने वाले इन सांसदों का आरोप है कि शिवसेना यूबीटी अपनी मूल विचारधारा से भटक चुकी है। उनका मानना है कि पार्टी के वरिष्ठ नेता कांग्रेस के साथ करीबी बढ़ाने की कोशिश कर रहे थे, जो कार्यकर्ताओं को स्वीकार्य नहीं था। इन सांसदों ने एकनाथ शिंदे के नेतृत्व को ही असली शिवसेना माना है।
अमित शाह का बयान और उद्धव की प्रतिक्रिया
केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने इस घटनाक्रम पर टिप्पणी करते हुए कहा कि अब केवल एक ही शिवसेना बची है, जिसके साथ गुट विशेष का नाम जोड़ने की जरूरत नहीं है। वहीं दूसरी ओर, उद्धव ठाकरे ने बगावत पर प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि जो नेता पार्टी छोड़ना चाहते हैं, वे स्वतंत्र हैं। उन्होंने याद दिलाया कि 4 साल पहले भी 40 विधायक अलग हुए थे, लेकिन उनका संघर्ष जारी रहेगा।
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