दक्षिण एशिया की सबसे लंबी प्राकृतिक गुफा भारत के इसी राज्य में, करोड़ों साल पुराने इतिहास और रहस्यों को समेटे है इसका भीतरी संसार

पूर्वोत्तर भारत के मेघालय में मौजूद 'क्रेम लियात प्राह' दक्षिण एशिया की सबसे लंबी प्राकृतिक गुफा मानी जाती है, जिसके 34 किलोमीटर से अधिक हिस्से का अब तक सर्वेक्षण हो चुका है।

भारत प्राकृतिक अजूबों और रहस्यमयी ठिकानों से भरा हुआ देश है। यहां कई ऐसे स्थान हैं जिनके बारे में बहुत कम लोगों को जानकारी है। इन्हीं में से एक है दक्षिण एशिया की सबसे लंबी प्राकृतिक गुफा, जो पूर्वोत्तर भारत के एक बेहद खूबसूरत राज्य में छिपी हुई है।

कहां स्थित है यह अनोखी गुफा

दक्षिण एशिया की सबसे लंबी प्राकृतिक गुफा को 'क्रेम लियात प्राह' के नाम से पहचाना जाता है। यह पूर्वोत्तर भारत के राज्य मेघालय के पूर्वी जयंतिया हिल्स ज़िले में मौजूद है। अपनी असाधारण लंबाई, रहस्यमयी सुरंगों और चट्टानों की अनूठी बनावट के चलते यह गुफा दुनियाभर के खोजकर्ताओं और प्रकृति प्रेमियों को अपनी ओर खींचती है।

कितनी लंबी है क्रेम लियात प्राह

क्रेम लियात प्राह को दक्षिण एशिया की सबसे लंबी प्राकृतिक गुफा का दर्जा हासिल है। अब तक इसके 34 किलोमीटर से अधिक हिस्से का सर्वेक्षण किया जा चुका है। इंजीनियरों का मानना है कि आने वाले समय में इसकी लंबाई और बढ़ सकती है, क्योंकि आसपास की दूसरी गुफाओं से इसके जुड़ने की संभावना बनी हुई है।

भीतर का अनोखा संसार

यह गुफा चूना पत्थर से बनी है और इसके भीतर विशाल कक्ष, संकरी सुरंगें, ज़मीन के नीचे बहती धाराएं तथा चट्टानों की विलक्षण प्राकृतिक आकृतियां देखने को मिलती हैं। इस गुफा का सबसे चर्चित हिस्सा 'एयरक्राफ्ट हैंगर' के नाम से जाना जाता है, जो इतना बड़ा है कि उसका आकार किसी हवाई जहाज़ के हैंगर के बराबर ठहरता है।

मेघालय को क्यों कहते हैं 'गुफाओं की भूमि'

मेघालय में 1,700 से भी ज़्यादा गुफाएं दर्ज की जा चुकी हैं। राज्य की चूना-पत्थर वाली पहाड़ियां और यहां होने वाली भारी बारिश गुफाओं के निर्माण के लिए आदर्श परिस्थितियां तैयार करती हैं। यही कारण है कि मेघालय को दक्षिण एशिया की 'केविंग कैपिटल' भी कहा जाता है।

क्या आम पर्यटक यहां जा सकते हैं

क्रेम लियात प्राह ऐसी जगह नहीं है जहां कोई भी आम सैलानी आसानी से पहुंच सके। इसकी जटिल संरचना और बहुत अधिक लंबाई को देखते हुए सलाह दी जाती है कि यहां केवल अनुभवी गुफा खोजकर्ताओं और प्रशिक्षित गाइडों के साथ ही प्रवेश किया जाए। हालांकि मेघालय में कई अन्य गुफाएं भी हैं, जिन्हें सामान्य पर्यटक सुरक्षित तरीके से देख सकते हैं।

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