बारिश आते ही क्यों मचल उठता है पकौड़ों के लिए मन? जानें इस ललक की असली वजह

मानसून और पकौड़ों का नाता भारत में बेहद गहरा है। आखिर बरसात में ही गरमा-गरम पकौड़े खाने की चाहत इतनी तेज़ क्यों हो जाती है, इसके पीछे विज्ञान और मनोविज्ञान दोनों की दिलचस्प भूमिका है।

आसमान में काली घटाएं घिरते ही और बारिश की पहली बूंदों के धरती पर पड़ते ही न जाने कितने लोगों का मन अचानक गरम चाय और कुरकुरे पकौड़ों की ओर भागने लगता है। हमारे देश में मानसून और पकौड़ों का रिश्ता इतना मज़बूत है कि इनके बिना बरसाती मौसम जैसे अधूरा ही महसूस होता है। पर क्या कभी आपने गौर किया है कि बारिश के मौसम में ही पकौड़ों की तलब इतनी ज़बरदस्त क्यों हो उठती है? इसका जवाब केवल स्वाद तक सीमित नहीं, बल्कि विज्ञान और मनोविज्ञान के एक रोचक तालमेल में छिपा हुआ है।

मौसम और मन की कैफियत का जुड़ाव

बरसात के समय वातावरण ठंडा और नमी से भरा हो जाता है। ऐसे माहौल में शरीर स्वाभाविक रूप से ऐसी चीज़ें खाने की मांग करता है जो उसे भीतर से गर्माहट दें। गरमा-गरम तले हुए पकौड़े शरीर को तुरंत गर्म होने का अहसास कराते हैं, और यही कारण है कि इस मौसम में मन सबसे ज़्यादा इन्हीं की ओर खिंचता है।

दिमाग पर "कम्फर्ट फ़ूड" का असर

विशेषज्ञों के मुताबिक कुछ खास व्यंजन हमारे लिए "कम्फर्ट फ़ूड" यानी सुकून देने वाले भोजन की तरह काम करते हैं। पकौड़े, चाय और बारिश का मेल बचपन की यादों को फिर से जीवंत कर देता है। परिवार के साथ बिताए पुराने पल और रेस्टोरेंट की पुरानी यादें ताज़ा हो जाती हैं और एक राहत भरा अहसास होता है। जब बारिश होती है तो दिमाग इन्हीं सुहाने पलों को दोबारा महसूस करना चाहता है, जिससे पकौड़ों की चाहत और भी प्रबल हो जाती है।

महक का खिंचाव

बरसात के दौरान ताज़े मसालों से बने पकौड़ों की सुगंध और भी ज़्यादा लुभावनी हो जाती है। नमी भरे वातावरण में खाने की खुशबू हवा में देर तक टिकी रहती है, जिससे भूख और तेज़ हो जाती है और खाने की इच्छा बढ़ जाती है।

ऊर्जा की बढ़ती मांग

ठंडे और सुहावने मौसम में शरीर को अधिक ऊर्जा की ज़रूरत महसूस हो सकती है। पकौड़ों में कार्बोहाइड्रेट और फ़ैट भरपूर मात्रा में मौजूद होते हैं, जो शरीर को फौरन ताकत देते हैं। यही वजह है कि लोग अक्सर बरसात के दिनों में इन्हें खाना पसंद करते हैं।

क्या रोज़ पकौड़े खाना सेहत के लिए सही है?

इसमें कोई शक नहीं कि पकौड़े बेहद स्वादिष्ट होते हैं, लेकिन इनमें तेल की मात्रा काफ़ी अधिक रहती है। इसी कारण इन्हें सीमित मात्रा में खाना ही बेहतर माना जाता है। आप चाहें तो सेहत के लिहाज़ से बेहतर विकल्प भी अपना सकते हैं, जैसे एयर फ़्रायर का उपयोग करना या कम तेल में बनाने के तरीके चुनना।

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