बीमारी को बनाया अपनी ताकत
मध्य प्रदेश के शिवपुरी में रहने वाली वीना चतुर्वेदी की कहानी संघर्ष और जीत की मिसाल है। साल 2006 से प्राइवेट नौकरी कर रही वीना एक सामान्य जीवन जी रही थीं, लेकिन 2024 में उनके जीवन में एक बड़ा मोड़ आया। एक बीमारी के चलते उन्हें लकवा मार गया, जिससे उनका करियर पूरी तरह रुक गया। घर की जिम्मेदारी का बोझ उनके कंधों पर था, लेकिन शारीरिक अक्षमता ने उन्हें नौकरी पर जाने से रोक दिया। हार मानने के बजाय उन्होंने खुद का कुछ करने का फैसला लिया।
शुरुआत मात्र 5,000 रुपये से
वीना को खाना बनाने का शौक था, जिसे उन्होंने अपनी आजीविका बनाने की ठानी। उन्होंने बाजार के जोखिम से बचने के लिए बेहद कम संसाधनों का इस्तेमाल किया। वीना ने शिवपुरी के कस्टम गेट पर मात्र 5,000 रुपये का निवेश किया। एक टेबल लगाई और धूप व बारिश से बचने के लिए एक साधारण छतरी के नीचे अपने फूड आउटलेट की शुरुआत की। उन्होंने अपने इस काम को एक बेहद खास नाम दिया मिडिल क्लास वाला।
व्यवसाय के मुख्य आंकड़े
- आउटलेट का नाम: मिडिल क्लास वाला
- शुरुआती निवेश: 5,000 रुपये
- टर्निंग पॉइंट: 2024 की बीमारी के बाद की शुरुआत
- दैनिक आय: 4,000 से 5,000 रुपये
बेटे के साथ मिलकर बढ़ाया कारोबार
शुरुआत में वीना ने केवल ब्रेड रोल, उपमा और मैगी से ग्राहकों का दिल जीता। धीरे-धीरे उनके हाथ के स्वाद के चर्चे फैलने लगे। उनकी मेहनत और जज्बे को देखकर उनके बेटे राज चतुर्वेदी भी उनके साथ जुड़ गए। अब राज उनके बिजनेस पार्टनर के रूप में पूरी मदद कर रहे हैं। आज वे एक टेबल से आगे बढ़कर फूड कार्ट चला रहे हैं, जिसमें अब कॉफी, भेल पूरी, पीनट चाट, स्वीट कॉर्न चाट, सैंडविच और इडली फ्राई जैसे कई व्यंजन शामिल हैं। हाल ही में उन्होंने पोहा भी अपने मेन्यू में जोड़ा है। आज मां-बेटे की यह जोड़ी रोजाना 4,000 से 5,000 रुपये तक की शानदार कमाई कर रही है और आत्मनिर्भर जीवन जी रही है।
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