जंगल का रक्षक: जानिए क्यों ब्लैक ड्रोंगो को कहा जाता है पक्षियों का कोतवाल

मध्य प्रदेश के बालाघाट जिले में पाए जाने वाले ब्लैक ड्रोंगो पक्षी अपनी सतर्कता और अनोखी आवाज के लिए मशहूर हैं। ये न केवल खुद को सुरक्षित रखते हैं, बल्कि अपनी चेतावनी भरी आवाज से अन्य पक्षियों को भी शिकारी जानवरों से बचाते हैं।

बालाघाट के वनों की शान

मध्य प्रदेश का बालाघाट जिला अपने प्राकृतिक संसाधनों और समृद्ध जंगलों के लिए पहचाना जाता है। जिले के लगभग 53 प्रतिशत भू-भाग पर फैले इन घने जंगलों में विविध प्रकार के वन्यजीव और पक्षी निवास करते हैं। इन्हीं में से एक बेहद दिलचस्प पक्षी है ब्लैक ड्रोंगो। यह पक्षी न केवल कान्हा नेशनल पार्क में, बल्कि गांवों और शहरों के आसपास लगे पेड़ों पर भी आसानी से नजर आ जाता है।

क्यों कहा जाता है जंगल का कोतवाल

ब्लैक ड्रोंगो को स्थानीय बोलचाल में भुजंगा या चाटू के नाम से भी जाना जाता है। इसे जंगल का कोतवाल कहे जाने के पीछे एक विशेष कारण है। यह पक्षी बेहद सतर्क होता है और अपने इलाके में किसी भी शिकारी पक्षी जैसे चील, बाज या कौए को भटकने नहीं देता है। जैसे ही इसे कोई खतरा महसूस होता है, यह अपनी बुलंद आवाज में चेतावनी जारी कर देता है, जिससे दूसरे पक्षी सतर्क हो जाते हैं। यही वजह है कि अन्य पक्षी इसके घोंसले के आसपास सुरक्षित महसूस करते हैं और अपने अंडे वहीं देते हैं।

पंखों का जादुई रंग

वैज्ञानिक दृष्टि से इसका नाम डिक्रूरस मैक्रोसेर्कस है। आकार में छोटा होने के बावजूद यह अपनी उपस्थिति दर्ज कराने में माहिर है। विशेषज्ञों के अनुसार, इसका मूल रंग गहरा काला होता है, लेकिन जब इसके पंखों पर सूर्य की रोशनी पड़ती है, तो वे कांच की तरह चमकते हैं और अपना रंग बदलकर नीले दिखाई देने लगते हैं।

पर्यावरण के लिए मददगार

ब्लैक ड्रोंगो केवल एक प्रहरी की भूमिका ही नहीं निभाता, बल्कि यह कीटों को नियंत्रित करने में भी बड़ी भूमिका निभाता है। यह छोटे कीड़ों का शिकार करता है और कई बार मवेशियों के शरीर पर बैठकर उन्हें नुकसान पहुंचाने वाले परजीवियों को साफ करता है। अपनी अनूठी खूबियों के कारण यह पक्षी पर्यावरण संतुलन बनाए रखने में एक अहम कड़ी माना जाता है।

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