राजस्थान में पहली बार आधुनिक टोल तकनीक
जयपुर-दिल्ली राष्ट्रीय राजमार्ग NH-48 पर स्थित दौलतपुरा टोल प्लाजा ने एक बड़ा बदलाव देखा है। अब यह राजस्थान का पहला ऐसा टोल प्लाजा बन गया है जो पूरी तरह से बैरियर-मुक्त और बूथ-मुक्त है। यहां मल्टी लेन फ्री फ्लो (MLFF) सिस्टम लागू किया गया है, जिसके बाद वाहन चालकों को टोल पर रुकने की कोई जरूरत नहीं पड़ेगी। इस तकनीक को विकसित देशों की तर्ज पर तैयार किया गया है ताकि यात्रा को तेज और सुगम बनाया जा सके।
परियोजना की लागत और तकनीकी विशेषताएं
राष्ट्रीय राजमार्ग प्राधिकरण (NHAI) ने इस हाई-टेक परियोजना पर लगभग 100 करोड़ रुपए खर्च किए हैं। इस व्यवस्था को सुचारू बनाने के लिए टोल प्लाजा पर दो विशेष गैन्ट्री लगाई गई हैं, जिनमें कुल 40 हाई-रेजोल्यूशन कैमरे लगे हैं।
- 32 कैमरे हर लेन से गुजरने वाले वाहनों की निगरानी करेंगे।
- 8 कैमरे पूरे ट्रैफिक सिस्टम पर नजर रखेंगे।
- कैमरे इतने उन्नत हैं कि तेज रफ्तार वाहनों की स्पष्ट तस्वीरें और चेहरे तक रिकॉर्ड कर सकते हैं।
सिस्टम के फायदे और Fastag की भूमिका
इस नई व्यवस्था का सबसे बड़ा फायदा यात्रियों को मिलेगा। अब टोल पर बार-बार ब्रेक लगाने और गाड़ी रोकने की जरूरत नहीं होगी। विशेषज्ञों के मुताबिक, इस बदलाव से ईंधन की खपत में करीब 10 प्रतिशत तक की कमी आ सकती है, जो पर्यावरण के लिए भी बेहतर है।
इस पूरे सिस्टम में Fastag सबसे महत्वपूर्ण है। वाहन चालकों को अपने Fastag वॉलेट में पर्याप्त बैलेंस रखना होगा। यदि कोई बिना बैलेंस के टोल से गुजरता है, तो NHAI की तरफ से ई-नोटिस भेजा जाएगा। समय पर भुगतान न करने पर वाहन को RTO पोर्टल पर ब्लैकलिस्ट भी किया जा सकता है।
राजस्व में बढ़ोतरी की उम्मीद
फिलहाल दौलतपुरा टोल प्लाजा से प्रतिदिन करीब 40 लाख रुपए का टोल संग्रह होता है। नई व्यवस्था के तहत टोल चोरी रोकने में भी मदद मिलेगी, जिससे प्रतिदिन 4 से 6 लाख रुपए तक का अतिरिक्त राजस्व मिलने का अनुमान है। बता दें कि गुजरात के चौरसिया और दिल्ली के मुंदका के बाद दौलतपुरा देश का तीसरा और राजस्थान का पहला MLFF टोल प्लाजा बन गया है।
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