राहत की खबर
मध्य प्रदेश में लंबे समय से चल रहे नर्सिंग फर्जीवाड़े के मामले में जबलपुर हाईकोर्ट ने हजारों छात्रों के पक्ष में फैसला सुनाया है। जस्टिस आनंद पाठक और जस्टिस बीपी शर्मा की डिवीजन बेंच ने लॉ स्टूडेंट्स एसोसिएशन द्वारा दायर जनहित याचिका पर सुनवाई करते हुए यह बड़ा आदेश जारी किया है।
इन छात्रों को मिला लाभ
कोर्ट के इस आदेश से उन हजारों छात्रों को बड़ी राहत मिली है जो अपने भविष्य को लेकर चिंतित थे। अब निम्नलिखित प्रक्रियाएं शुरू हो सकेंगी:
- शैक्षणिक सत्र 2022-23 के GNM प्रथम वर्ष के अटके हुए परीक्षा परिणाम घोषित किए जाएंगे।
- शैक्षणिक सत्र 2021-22 के लगभग 9,000 छात्रों के लिए GNM तृतीय वर्ष की परीक्षाएं आयोजित होंगी।
केवल इन कॉलेजों को मिली मंजूरी
हाईकोर्ट ने यह स्पष्ट किया है कि यह राहत हर कॉलेज के लिए नहीं है। अनुमति केवल उन्हीं संस्थानों को दी गई है जिन्हें CBI जांच में 'उपयुक्त' (Suitable) माना गया है। इस संबंध में स्थिति इस प्रकार है:
- राज्य के कुल 695 नर्सिंग कॉलेजों की जांच की गई थी।
- इसमें से 156 कॉलेज शुरू से ही जांच में सही पाए गए थे।
- वहीं 89 कॉलेजों ने अपनी कमियों को दूर करके 'उपयुक्त' का दर्जा हासिल किया है।
- इस तरह कुल 245 कॉलेजों में अब परीक्षाएं और रिजल्ट की प्रक्रिया आगे बढ़ सकेगी।
अनियमितता पर सख्ती बरकरार
राहत देने के साथ ही कोर्ट ने अपना रुख स्पष्ट रखा है। जो कॉलेज मानकों पर खरे नहीं उतरे हैं या जिनमें अनियमितताएं पाई गई हैं, उन पर परीक्षाओं और अन्य शैक्षणिक गतिविधियों को लेकर फिलहाल रोक जारी रहेगी। कोर्ट का जोर केवल उन संस्थानों और छात्रों के हित सुरक्षित करने पर है जो निर्धारित नियमों का पालन कर रहे हैं।
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