राम मंदिर में दान पात्र की लूट: पापी पकड़े जाएंगे, लेकिन लापरवाहों का क्या?

अयोध्या के राम मंदिर में कई सालों से दान पात्र से चोरी हो रही थी और Nripendra Mishra ने इसे महापाप मानते हुए SIT जांच में कड़ी कार्रवाई का भरोसा दिलाया। वहीं Uddhav Thackeray की पार्टी में दूसरी बड़ी टूट आई, 9 में से 6 सांसदों ने Eknath Shinde की पार्टी में जाने का फैसला कर लिया।

Nripendra Mishra का स्वीकारोक्ति: हां, चोरी हुई, पाप हुआ

अयोध्या के राम मंदिर में दान पात्र से चोरी की बात अब खुलकर सामने आ गई है। राम मंदिर निर्माण समिति के अध्यक्ष Nripendra Mishra ने खुद माना कि चढ़ावे में चोरी हुई और यह एक बड़ा पाप है। साथ ही उन्होंने यह भी साफ किया कि इस महापाप को करने वाले बचेंगे नहीं। Yogi और Modi किसी को नहीं छोड़ेंगे, SIT की जांच में पूरी सच्चाई सामने आएगी, चोर पकड़े जाएंगे और दोबारा ऐसा न हो इसके लिए भी ठोस इंतजाम किए जाएंगे।

Nripendra Mishra ने यह भी कहा कि मंदिर ट्रस्ट के महासचिव Champat Rai की निष्ठा पर किसी को कोई शक नहीं, लेकिन उनकी निगरानी में चूक जरूर हुई। SIT की जांच में पूरी व्यवस्था की कमजोरियां एक-एक करके उजागर होंगी।

कई सालों से चल रही थी चोरी, सभी मिले हुए थे

प्रभु राम के मंदिर में यह लूट किसी एक दिन की बात नहीं थी। कई सालों से दान पात्र पर हाथ साफ किया जा रहा था। इसमें बैंक के कर्मचारी, नोट गिनने वाले और निगरानी की जिम्मेदारी संभालने वाले, सभी मिले हुए थे।

नियम तो बहुत कड़े बनाए गए थे:

  • गिनती करने वाले कर्मचारी बिना जेब के कपड़े पहनेंगे।
  • CCTV कैमरों से हर गतिविधि पर नजर रखी जाएगी।

लेकिन इन नियमों की किसी ने परवाह नहीं की। मंदिर में दान के रूप में आए आभूषणों का भी कोई ठीक-ठाक हिसाब-किताब नहीं रखा गया।

Minting Corporation Of India से agreement क्यों नहीं हुआ?

तिरुपति बालाजी मंदिर में दान में आए आभूषणों की पहचान और मूल्यांकन Minting Corporation Of India करती है। लेकिन राम मंदिर में Minting Corporation Of India के साथ agreement sign होते होते क्यों रह गया? जब मंदिर में खुलेआम चोरी हो रही थी, तब मंदिर प्रशासन क्या कुंभकर्ण की नींद सोया हुआ था?

अब SIT के हाथ उन लोगों तक पहुंच गए हैं जिन्होंने नोटों की गड्डियां और आभूषण चुराए। SIT की रिपोर्ट को FIR में बदला जाएगा और इन पापियों को सजा मिलेगी। लेकिन जिन पर मंदिर के मैनेजमेंट की जिम्मेदारी थी, जिनकी लापरवाही और गैरजिम्मेदारी की वजह से इतनी बड़ी लूट हुई, क्या वे भी इस पाप के भागीदार नहीं हैं?

जिम्मेदार अधिकारियों पर कार्रवाई कौन करेगा?

असली सवाल यह है कि इन लापरवाह जिम्मेदारों पर कार्रवाई कौन करेगा? क्या उन्हें सिर्फ इसलिए माफ कर दिया जाएगा क्योंकि वे 30-35 साल से राम मंदिर आंदोलन से जुड़े हैं और खुद ईमानदार हैं? जिनकी जिम्मेदारी निगरानी की थी, जिन्होंने प्रभु राम की मर्यादा तोड़ी और भक्तों की श्रद्धा का अपमान किया, ऐसे लोगों की छुट्टी होनी चाहिए।

Uddhav Thackeray की पार्टी में दूसरी बड़ी टूट

Uddhav Thackeray की पार्टी में आज दूसरी बार बड़ी टूट हो गई। जो 9 सांसद बचे थे, उनमें से 6 ने बगावत कर दी। अब सिर्फ 3 सांसद Uddhav Thackeray के साथ रह गए हैं। संसदीय दल के नेता Arvind Sawant ने सांसदों की बैठक बुलाई और व्हिप भी जारी किया, लेकिन उस बैठक में केवल Arvind Sawant, Anil Desai और Rajabhau Waje ही पहुंचे। जो 6 बागी सांसद नहीं आए, उन्हें कारण बताओ नोटिस भेजा गया।

Arvind Sawant और Sanjay Raut खुद जानते हैं कि यह नोटिस बेकार है। 6 बागी सांसद लोकसभा स्पीकर को लिखित में दे चुके हैं कि वे Eknath Shinde की पार्टी में शामिल हो रहे हैं और उनके अलग बैठने की व्यवस्था की जाए।

Sanjay Raut की भाषा भी काम न आई

Arvind Sawant ने बागी सांसदों के बारे में कुछ कड़े शब्द कहे, लेकिन Sanjay Raut ने तो हद पार कर दी। उन्होंने बेहद अभद्र भाषा का इस्तेमाल किया। Raut ने दावा किया कि वह 'सामना' के संपादक हैं और भाषा की मर्यादा जानते हैं, लेकिन इसके बाद भी बागी सांसदों के लिए पांच बार वही गालियां दोहराईं।

पहले प्यार से मनाने की कोशिश की गई, फिर गालियां दी गईं, 15-15 करोड़ रुपये लेने का इल्जाम लगाया गया और धमकियां भी दी गईं, लेकिन नतीजा कुछ नहीं निकला।

सातवें के जाने के भी पूरे आसार

9 में से 6 सांसद जा चुके हैं और सातवें के फरार होने के भी पूरे-पूरे आसार हैं। शुक्रवार को Shiv Sena का स्थापना दिवस है और पार्टी के अंदर डर है कि कहीं विधायक भी न खिसक जाएं। साफ है कि इन सभी ने Shinde वाले विभाजन से कोई सबक नहीं लिया। यह भी सब जानते हैं कि इस बर्बादी के लिए कौन जिम्मेदार है।

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