सम्राट चौधरी का एआई वाला विजन और लोगों की प्रतिक्रिया
बिहार के मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी का एक हालिया बयान सोशल मीडिया पर चर्चा का विषय बन गया है। मुख्यमंत्री ने एक सार्वजनिक मंच से दावा किया है कि आने वाले समय में आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस यानी एआई का उपयोग करके बिहार की जनता के कष्टों और समस्याओं का पता मात्र 5 मिनट के भीतर लगाया जा सकेगा। इस दावे को पूरा करने के लिए सरकार ने बिहार में एक एआई और कंप्यूटर साइंस यूनिवर्सिटी स्थापित करने का प्रस्ताव तैयार कर लिया है, जिसे मंजूरी के लिए राज्यपाल के पास भेज दिया गया है।
मुख्यमंत्री का यह मानना है कि एआई तकनीक के माध्यम से राज्य के हर बूथ और हर पंचायत की जमीनी हकीकत और वहां रहने वाले लोगों की समस्याओं को तुरंत ट्रैक किया जा सकेगा। हालांकि, इस बयान के सामने आते ही सोशल मीडिया यूजर्स ने इसे आड़े हाथों लेना शुरू कर दिया है। लोग सरकारी तंत्र की मौजूदा बदहाली और बुनियादी सुविधाओं की कमी को लेकर मुख्यमंत्री पर सवाल उठा रहे हैं।
सोशल मीडिया पर मजे ले रही है जनता
जैसे ही मुख्यमंत्री का यह बयान सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म्स पर वायरल हुआ, नेटिजन्स ने अपनी प्रतिक्रियाएं देनी शुरू कर दीं। लोगों का मुख्य सवाल यह है कि क्या एआई केवल समस्याओं की पहचान करेगा या फिर सरकार उन समस्याओं के ठोस समाधान के लिए भी कोई कदम उठाएगी। एक्स जैसे प्लेटफॉर्म्स पर लोग लगातार अपनी राय साझा कर रहे हैं और सरकार की प्राथमिकता पर सवाल खड़ा कर रहे हैं।
समर राज नाम के एक यूजर ने कटाक्ष करते हुए लिखा कि मुख्यमंत्री भले ही एआई से जनता का कष्ट पता करने की बात कर रहे हों, लेकिन वे यह समझ पाने में विफल रहे कि पटना जैसे वीआईपी इलाके के मतदाताओं ने भाजपा को खारिज कर प्रशांत किशोर को क्यों चुना। उन्होंने यह भी तंज कसा कि मुख्यमंत्री अभी खुद एआई तकनीक का सही इस्तेमाल सीख नहीं पाए हैं।
सरकारी सुविधाओं पर उठ रहे तीखे सवाल
इस पूरी बहस के दौरान एक यूजर प्रियांशी सिंह ने बिहार की जमीनी स्थिति को लेकर सरकार के दावों की पोल खोल दी है। प्रियांशी का तर्क है कि जहां एक तरफ मुख्यमंत्री एआई यूनिवर्सिटी बनाने के सपने दिखा रहे हैं, वहीं राज्य की वास्तविक स्थिति काफी चिंताजनक है। उनके अनुसार, बिहार की सड़कें, सरकारी स्कूल, अस्पताल और सुरक्षा व्यवस्था पहले से ही बेहद दयनीय और विकलांग अवस्था में हैं। ऐसे में एआई यूनिवर्सिटी की बात करना आम जनता को गुमराह करने जैसा है।
गौरव पांडे नामक यूजर ने तो हद ही कर दी। उन्होंने अपने ट्वीट में लिखा कि अगर एआई के जरिए 5 मिनट में कष्ट पता चल सकते हैं, तो अब राज्य में एक एआई मुख्यमंत्री की भी नियुक्ति होनी चाहिए जो इन समस्याओं का त्वरित समाधान कर सके। मजहर खान ने भी इसी सुर में अपनी बात रखी और कहा कि अब केवल इस बात का इंतजार है कि एआई द्वारा समस्याओं को जानने के बाद सरकार उन्हें सुलझाती भी है या मामला सिर्फ रिपोर्टिंग तक सीमित रहेगा।
यूनिवर्सिटी और तकनीक पर तंज
मनीष यादव नाम के एक अन्य यूजर ने बिहार की शैक्षणिक स्थिति पर चुटकी लेते हुए कहा कि राज्य में फिजिक्स यूनिवर्सिटी बनाने की बात तो बस कागजों तक ही सीमित रह गई, अब एआई यूनिवर्सिटी का नया शिगूफा छोड़ दिया गया है। उन्होंने यह भी जोड़ा कि अब मुख्यमंत्री के पास समस्या हल न करने का कोई बहाना नहीं बचेगा, क्योंकि एआई हर चीज साफ-साफ बता देगा।
मोहित त्रिपाठी ने भी इस मुद्दे पर कटाक्ष किया कि बिहार के लोगों के लिए अब फिजिक्स, केमिस्ट्री और मैथ की यूनिवर्सिटी के बाद एआई यूनिवर्सिटी का उपहार लेकर आया गया है। उन्होंने कहा कि अभी तक एआई यूनिवर्सिटी की चर्चा सिर्फ दुबई जैसे शहरों में सुनने को मिलती थी, लेकिन बिहार में इसका दावा करना एक अलग ही स्तर की राजनीति है।
क्या एआई से सच में होगा विकास?
मुख्यमंत्री का तर्क है कि वे एक साथ 400 बूथों की निगरानी नहीं कर सकते, इसलिए एआई का सहारा लेना जरूरी है। उनका कहना है कि तकनीक के जरिए वे हर बूथ पर मौजूद समस्या को 5 मिनट में जान सकेंगे और उस पर तुरंत एक्शन ले पाएंगे। लेकिन जनता का मानना है कि तकनीक केवल एक माध्यम है, असली बदलाव के लिए जमीनी स्तर पर काम और इच्छाशक्ति की आवश्यकता होती है।
फिलहाल यह बयान बिहार के सियासी गलियारों और सोशल मीडिया पर खूब धूम मचा रहा है। लोग लगातार पूछ रहे हैं कि क्या एआई आने से बिहार की सड़कें सुधर जाएंगी, क्या स्कूलों की शिक्षा में गुणात्मक सुधार होगा और क्या अस्पतालों में इलाज की सुविधाएं बेहतर हो पाएंगी? इन सवालों के जवाब आने वाला समय ही देगा, लेकिन फिलहाल सोशल मीडिया पर सम्राट चौधरी का यह एआई वाला दांव पूरी तरह से चर्चाओं में है।
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