झारखंड में 'No Congress' सरकार का नया फॉर्मूला, क्या Hemant Soren लेंगे बड़ा फैसला?

झारखंड राज्यसभा चुनाव में क्रॉस वोटिंग के बाद महागठबंधन में दरार सामने आई है। अब JD(U) विधायक Saryu Roy ने मुख्यमंत्री Hemant Soren को कांग्रेस के बिना नई सरकार बनाने का एक नया फॉर्मूला सुझाया है।

झारखंड राज्यसभा चुनाव में NDA समर्थित निर्दलीय उम्मीदवार Parimal Nathwani की अप्रत्याशित जीत ने राज्य की राजनीति में भूचाल ला दिया है। सत्ताधारी महागठबंधन में हुई भारी क्रॉस वोटिंग के बाद से ही सरकार के भविष्य को लेकर अटकलें तेज हो गई हैं। इसी सियासी हलचल के बीच, जनता दल यूनाइटेड के एक वरिष्ठ विधायक ने मुख्यमंत्री Hemant Soren को एक नया राजनीतिक फॉर्मूला सुझाया है।

Saryu Roy का बड़ा सुझाव: Congress को गठबंधन से बाहर करें

रांची। झारखंड में राज्यसभा चुनाव के नतीजों के बाद राजनीतिक समीकरण तेजी से बदल रहे हैं। Congress उम्मीदवार की हार और NDA समर्थित निर्दलीय उम्मीदवार Parimal Nathwani की जीत ने महागठबंधन के भीतर विश्वास पर सवाल खड़े कर दिए हैं। एक तरफ Congress ने 'कड़ा निर्णय' लेने की बात कही है, वहीं RJD ने क्रॉस वोटिंग से इनकार करते हुए Congress को आत्म-चिंतन की सलाह दी है, जिससे सियासी गरमाहट और बढ़ गई है। महागठबंधन में बढ़ती दरार की अटकलों के बीच, JD(U) विधायक Saryu Roy ने एक नया राजनीतिक फॉर्मूला पेश कर सियासी चर्चाओं को हवा दे दी है।

Saryu Roy का 'No Congress' फॉर्मूला क्या है?

एक टेलीविजन चैनल से बातचीत में JD(U) विधायक Saryu Roy ने मुख्यमंत्री Hemant Soren को Congress को महागठबंधन से बाहर निकालने का फॉर्मूला सुझाया है। उन्होंने बताया कि इस फॉर्मूले के तहत, झारखंड मुक्ति मोर्चा (JMM) के पास 34 विधायक हैं, राष्ट्रीय जनता दल (RJD) के पास 4 एमएलए हैं, वाम दलों के 2 विधानसभा सदस्य हैं, और JD(U) से वे खुद 1 विधायक हैं। इस तरह कुल विधायकों की संख्या 41 हो जाती है, जो 81 सदस्यों वाली झारखंड विधानसभा में बहुमत के लिए पर्याप्त है। उन्होंने Hemant Soren को इस फॉर्मूले के आधार पर सरकार बनाने की पेशकश की है।

Saryu Roy का यह बयान ऐसे समय आया है, जब राज्यसभा चुनाव में महागठबंधन के घोषित संख्या बल के बावजूद Congress उम्मीदवार Pranav Jha हार गए और NDA समर्थित Parimal Nathwani जीत गए। चर्चा है कि महागठबंधन के कुछ विधायकों ने NDA समर्थित उम्मीदवार के पक्ष में वोट डाला, जिससे उनकी जीत सुनिश्चित हुई। Congress के कड़े तेवर और महागठबंधन में बढ़ती दरार के बीच, Jharkhand की राजनीति में Saryu Roy के इस फॉर्मूले को लेकर नई बहस छिड़ गई है।

Congress की हार ने बढ़ाया अविश्वास

राज्यसभा चुनाव में महागठबंधन के पास पर्याप्त संख्या होने का दावा किया गया था, लेकिन वोटों के आंकड़े चौंकाने वाले रहे। 81 सदस्यों में से 31 विधायकों ने JMM के बैद्यनाथ राम को, 28 विधायकों ने निर्दलीय Parimal Nathwani को वोट दिया। वहीं, Congress के Pranav Jha को केवल 19 वोट मिले और 3 वोट अमान्य घोषित कर दिए गए। Congress उम्मीदवार की इस हार ने सवाल खड़ा कर दिया कि क्रॉस वोटिंग आखिर किसने की? Congress के कई नेताओं ने सहयोगी दलों पर खुलकर सवाल उठाए हैं और इसे 'विश्वासघात' बताया है। इसी वजह से गठबंधन के भीतर तनाव साफ दिख रहा है।

Congress के कड़े तेवर और 'गद्दार यार' वाली रार

इस चुनावी हार के बाद Congress पूरी तरह आक्रामक हो गई है। Congress के मीडिया प्रभारी ने सोशल मीडिया पर 'कड़ा निर्णय लेने' की चेतावनी दी है। वहीं, Congress विधायक Suresh Baitha ने तो खुलकर आरोप लगाया है कि RJD और माले के विधायक उनके साथ फाइव स्टार होटलों में 'शाही व्यंजनों का लुत्फ उठा रहे थे', लेकिन 'ऐन वक्त पर उन्होंने हमारी पीठ में छुरा भोंक दिया।' Suresh Baitha ने मुख्यमंत्री Hemant Soren से RJD को कैबिनेट से बाहर करने तक की मांग कर डाली थी। हालांकि, Saryu Roy के इस ताजा बयान ने पूरी स्थिति पलट दी है, और RJD को हटाने की मांग करने वाली Congress अब खुद गठबंधन से बाहर होने के कगार पर खड़ी दिख रही है।

क्या Congress के बिना सरकार संभव है?

Congress और RJD के बीच आरोप-प्रत्यारोप के बीच Saryu Roy का 41 विधायकों वाला फॉर्मूला चर्चा में आया है। उनका इशारा है कि यदि Congress से रिश्ते और बिगड़ते हैं, तो JMM अन्य सहयोगियों के साथ मिलकर भी सरकार चला सकती है। हालांकि, राजनीतिक जानकारों का मानना है कि यह राजनीतिक रूप से उतना आसान नहीं होगा। सरकार बनाना सिर्फ संख्याओं का खेल नहीं होता, बल्कि इसमें स्थिरता, साझा एजेंडा और राजनीतिक विश्वास भी महत्वपूर्ण होते हैं। JD(U) राष्ट्रीय स्तर पर NDA का हिस्सा है, जबकि Jharkhand में उसका सिर्फ 1 विधायक है। ऐसे में इस फॉर्मूले की व्यवहारिकता पर भी सवाल उठ रहे हैं।

क्या Hemant Soren, Saryu Roy के फॉर्मूले को मानेंगे?

झारखंड की राजनीति के जानकारों का मानना है कि Saryu Roy का यह बयान महज एक सुझाव नहीं, बल्कि मुख्यमंत्री Hemant Soren के इशारे पर Congress पर दबाव बनाने की एक सोची-समझी रणनीति हो सकती है। JMM इस बात से भली-भांति परिचित है कि Congress के भीतर टिकट बंटवारे और अंदरूनी कलह को लेकर भारी असंतोष है। ऐसे में, अगर Hemant Soren, Saryu Roy के इस 41 विधायकों वाले 'No Congress' फॉर्मूले पर आगे बढ़ते हैं, तो Jharkhand की राजनीति में एक नया अध्याय लिखा जाएगा। फिलहाल गेंद मुख्यमंत्री Hemant Soren के पाले में है, और आने वाले कुछ दिन यह तय करेंगे कि Jharkhand में मौजूदा सरकार जारी रहेगी या नए समीकरणों के साथ Congress को सत्ता से बाहर कर दिया जाएगा।

क्या Hemant Soren इतना बड़ा जोखिम उठाएंगे?

दूसरी ओर, Jharkhand की राजनीति में अभी तक मुख्यमंत्री Hemant Soren या JMM की ओर से Congress को सरकार से बाहर करने का कोई सीधा संकेत नहीं दिया गया है। इसके बजाय, चुनावी झटके के बावजूद गठबंधन को बचाने के प्रयास ज्यादा महत्वपूर्ण लग रहे हैं। राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि JMM बखूबी जानता है कि विधानसभा चुनावों और राष्ट्रीय राजनीति, दोनों में ही Congress उसके लिए एक अहम सहयोगी है। ऐसे में, सिर्फ एक राज्यसभा चुनाव के आधार पर गठबंधन तोड़ना राजनीतिक रूप से एक महंगा कदम साबित हो सकता है।

दबाव बढ़ गया है!

हालांकि, इस पूरे घटनाक्रम का सबसे बड़ा प्रभाव यह हुआ है कि Congress अब अपने सहयोगियों से जवाब मांग रही है। पार्टी नेताओं के बयानों से अंदरूनी नाराजगी की गहराई साफ झलकती है। दूसरी तरफ, विपक्ष इस अवसर का राजनीतिक लाभ उठाने की कोशिश कर रहा है। Saryu Roy का बयान भी इसी माहौल में आया है, जिसने नई राजनीतिक चर्चा छेड़ दी है। Saryu Roy ने साफ कहा है कि Hemant Soren को इस 'नए और साफ-सुथरे फॉर्मूले' के तहत तुरंत एक नई सरकार का गठन करना चाहिए।

झारखंड की राजनीति में आगे क्या?

फिलहाल, Saryu Roy का फॉर्मूला सिर्फ राजनीतिक चर्चा का विषय है, कोई आधिकारिक प्रस्ताव नहीं। लेकिन यह साफ हो गया है कि राज्यसभा चुनाव ने महागठबंधन के भीतर विश्वास की दरार को उजागर कर दिया है। आने वाले दिनों में यदि Congress और JMM के बीच राजनीतिक संवाद मजबूत नहीं होता है, तो यह दरार और गहरी हो सकती है। अभी के लिए यह तय है कि Jharkhand की राजनीति में संख्याओं से ज्यादा भरोसा एक बड़ा मुद्दा बन गया है।

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