परिमल नथवानी की अप्रत्याशित जीत
झारखंड राज्यसभा चुनाव में एनडीए के समर्थन से निर्दलीय उम्मीदवार परिमल नथवानी ने 28 वोट हासिल किए, जबकि एनडीए के पास केवल 24 विधायक थे। वहीं, कांग्रेस के प्रणव झा को 28 वोटों के बावजूद केवल 19 वोट मिले। इस चुनाव में महागठबंधन के 3 वोट अमान्य कर दिए गए। इसके साथ ही, क्रॉस वोटिंग के संकेत भी मिले हैं, जिससे गठबंधन में दरार की आशंका बढ़ गई है।
महागठबंधन की रणनीति पर सवाल
इस चुनाव ने झारखंड की राजनीति में हलचल मचा दी है। सभी यह जानने के लिए उत्सुक हैं कि महागठबंधन के पास प्रचंड बहुमत होते हुए भी प्रणव झा को हार का सामना क्यों करना पड़ा। एनडीए समर्थित नथवानी ने एक बार फिर अपनी राजनीतिक चतुराई साबित की है। झारखंड विधानसभा में 81 सीटों में महागठबंधन के पास 56 विधायक हैं, जबकि एनडीए के पास सिर्फ 24 विधायक हैं।
वोटों का गणित
राज्यसभा की एक सीट जीतने के लिए 28 वोटों की आवश्यकता थी। महागठबंधन में झामुमो के 34, कांग्रेस के 16, राजद के 4 और भाकपा माले के 2 विधायक शामिल हैं। झामुमो ने पहले सीट पर बैद्यनाथ राम को 30 वोट देकर जीत दिलाई। इसके बाद, महागठबंधन के पास प्रणव झा के लिए 26 वोट होने चाहिए थे, लेकिन उन्हें केवल 19 वोट मिले।
किसने किया खेला?
झारखंड कांग्रेस के प्रभारी राजू ने चुनाव परिणाम के बाद कहा कि महागठबंधन के कुछ सहयोगियों ने कांग्रेस को वोट नहीं दिया है। उन्होंने सीधे झामुमो की ओर इशारा किया। दूसरी ओर, राजद ने दावा किया कि उनके सभी 4 विधायक एकजुट थे और उन्होंने प्रणव झा को ही वोट दिया।
वोट रद्द होने का रहस्य
कांग्रेस की हार यह संकेत देती है कि महागठबंधन में बड़ी सेंधमारी हुई है। यदि झामुमो के 4 विधायकों ने कांग्रेस को वोट दिया होता, तो संख्या 20 होती, लेकिन प्रणव झा को केवल 19 वोट मिले। इसका मतलब यह हो सकता है कि या तो झामुमो के 3 वोट रद्द हो गए या फिर कांग्रेस के अपने ही विधायकों ने क्रॉस वोटिंग की।
इस चुनाव ने यह स्पष्ट कर दिया है कि कांग्रेस इस बार राजनीतिक चक्रव्यूह में बुरी तरह फंस गई है।
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