हर निर्देशक और निर्माता का सपना होता है कि उसकी फिल्म सिनेमाघरों में पहुंचते ही ब्लॉकबस्टर बन जाए। कोई भी जानबूझकर फ्लॉप फिल्म नहीं गढ़ना चाहता, लेकिन बॉलीवुड की दुनिया विरोधाभासों से भरी पड़ी है। एक नामचीन निर्माता ने एक फिल्म में पैसा लगाया, मगर मन ही मन यही चाहते रहे कि वह नाकाम हो जाए। हुआ ठीक इसके उलट—फिल्म पर्दे पर आते ही सुपरहिट निकली। इसके गीत इतने लोकप्रिय हुए कि आज भी लोगों की जुबान पर चढ़े हैं। हैरानी की बात यह रही कि इस कामयाबी से मेकर्स खुश होने के बजाय दुखी हो गए।
1979 की 'नूरी' से जुड़ा है पूरा किस्सा
क्या कोई निर्देशक या निर्माता सपने में भी यह सोच सकता है कि उसकी फिल्म पिट जाए? जवाब निश्चित ही 'नहीं' होगा। लेकिन 70 के दशक में एक ऐसी फिल्म आई थी, जिसके निर्माता हर हाल में उसे फ्लॉप देखना चाहते थे। छोटे बजट में बनी यह फिल्म रिलीज होते ही सुपरहिट साबित हुई और इसकी सफलता ने मेकर्स को निराश कर दिया। यह पूरा वाकया 1979 में आई फिल्म 'नूरी' से जुड़ा हुआ है।
यश चोपड़ा ने निभाया अपना वादा
'नूरी' का नाम सुनते ही 'आ जा रे, ओ मेरे दिलबर आ जा, दिल की प्यास बुझा रे' गीत याद आ जाता है। यह फिल्म 11 मई 1979 को रिलीज हुई थी और इसका निर्देशन मनमोहन कृष्ण ने किया था। चरित्र अभिनेता मनमोहन कृष्ण जब 'धूल का फूल' में काम कर रहे थे, तभी यश चोपड़ा ने उनसे उन्हें निर्देशक बनाने का वादा किया था। 'नूरी' के जरिए यश चोपड़ा ने यह वादा पूरा किया। फिल्म की कहानी सागर सरहदी ने लिखी थी।
पूनम ढिल्लो की डेब्यू फिल्म
फिल्म में फारुक शेख, पूनम ढिल्लो और मदन पुरी मुख्य भूमिका में थे। यह पूनम ढिल्लो की पहली फिल्म थी। फिल्म का यादगार संगीत खय्याम साहब ने तैयार किया था, जबकि गीत जां निसार अख्तर, मजरूह सुल्तानपुरी और नक्श ल्यालपुरी ने लिखे। निर्माता यश चोपड़ा थे और इसे यशराज फिल्म्स के बैनर तले रिलीज किया गया था। फिल्म की कामयाबी में सबसे बड़ी भूमिका इसके सदाबहार गीतों की रही।
सदाबहार गीतों ने बांधा समां
'आजा ओ मेरे दिलवर आजा' गीत आज भी सुनने वालों को मंत्रमुग्ध कर देता है। यह गाना फिल्म में दो बार आता है और इसे लता मंगेशकर तथा नितिन मुकेश ने स्वर दिया है। इस गीत को गीतकार जावेद अख्तर के पिता जां निसार अख्तर ने लिखा था। फिल्म के अन्य चर्चित गीतों में 'चोरी चोरी कोई आए', 'कदर तूने ना जानी', 'उसके खेल निराले, वो ही जाने' और 'आशिक हो तो ऐसा हो' शामिल थे।
रातोंरात स्टार बनीं पूनम ढिल्लो
'नूरी' ने पूनम ढिल्लो को रातोंरात स्टार बना दिया। रिलीज के बाद हर कोई उनकी निजी जिंदगी के बारे में जानने को उत्सुक रहता था और कई निर्माताओं ने उन्हें अपनी फिल्मों में मौका दिया। इतना ही नहीं, इस फिल्म से फारुक शेख को भी काफी फायदा मिला और उन्हें एक अलग पहचान हासिल हुई।
बॉक्स ऑफिस पर शानदार कमाई
'नूरी' बॉक्स ऑफिस पर सुपरहिट रही और यह 1979 की सातवीं सबसे ज्यादा कमाई करने वाली फिल्म बनी। फिल्म का बजट करीब 1.10 करोड़ था, जबकि इसने 2.5 करोड़ का कलेक्शन किया। चीन में भी यह फिल्म खूब सराही गई, जहां इसे 1981 में रिलीज किया गया था।
आखिर क्यों चाहते थे फिल्म फ्लॉप हो
दरअसल, निर्माता यश चोपड़ा ने यह फिल्म टैक्स बचाने के मकसद से बनाई थी और उनका मानना था कि यह नहीं चलेगी। उन्हीं दिनों वे बड़े बजट की फिल्म 'काला पत्थर' भी बना रहे थे और उनका पूरा ध्यान उसी पर लगा था। उन्हें भरोसा था कि 'काला पत्थर' बहुत बड़ी हिट होगी, मगर नतीजा ठीक उलटा निकला। 'नूरी' उम्मीद से कहीं ज्यादा कामयाब रही।
उम्मीदों वाली फिल्म रही औसत
'काला पत्थर' सत्य घटना पर आधारित थी, जिसकी कहानी सलीम-जावेद ने लिखी थी और निर्देशन व निर्माण यश चोपड़ा ने ही किया था। इस फिल्म में शशि कपूर, अमिताभ बच्चन, राखी गुलजार, शत्रुघ्न सिन्हा, परवीन बॉबी, नीतू सिंह, प्रेम चोपड़ा और मैक मोहन नजर आए थे। संगीत राजेश रोशन का और गीत साहिर लुधियानवी के थे। इसके लोकप्रिय गीतों में 'बाहों में तेरी मस्ती के घेरे-मस्ती के घेरे' और 'एक रास्ता है जिंदगी' शामिल हैं। यह फिल्म 1979 की सबसे ज्यादा कमाई करने वाली फिल्मों की सूची में पांचवें स्थान पर रही। 1 करोड़ रुपये के बजट में बनी इस फिल्म ने 3 करोड़ का कलेक्शन किया, लेकिन बजट अधिक होने के कारण इसे औसत करार दिया गया। इस तरह जिस फिल्म से बड़ी उम्मीदें थीं वह औसत साबित हुई, जबकि जिसे टैक्स बचाने के लिए बनाया गया था वह सुपरहिट निकली।
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