सुल्तानपुर के सीताकुंड घाट का होगा कायाकल्प, करीब 4 करोड़ से आकार लेगा भव्य गोमती कॉरिडोर

रामायण काल से जुड़े सुल्तानपुर के सीताकुंड घाट को 3 करोड़ 75 लाख रुपये की लागत से भव्य गोमती कॉरिडोर के रूप में विकसित किया जाएगा, जिसमें श्रद्धालुओं के लिए कई आधुनिक सुविधाएं जुटाई जाएंगी।

उत्तर प्रदेश के सुल्तानपुर जिले के लोगों के लिए एक बड़ी खुशखबरी सामने आई है। रामायण काल से जुड़े और ऐतिहासिक महत्व रखने वाले शहर के प्रसिद्ध सीताकुंड घाट को अब नया और भव्य स्वरूप दिया जाएगा। इसके लिए 3 करोड़ 75 लाख रुपये की लागत से 'गोमती कॉरिडोर' परियोजना को हरी झंडी मिल गई है। इस योजना के तहत घाट को पक्का और सुंदर बनाने के साथ ही महिलाओं के लिए चेंजिंग रूम, आधुनिक शौचालय और आकर्षक लाइटिंग जैसी कई सुविधाएं विकसित की जाएंगी।

माता सीता से जुड़ी है घाट की मान्यता

सुल्तानपुर जिला इन दिनों विकास की नई रफ्तार पकड़ रहा है और इसी कड़ी में शहरवासियों की बरसों पुरानी एक बड़ी मांग पूरी होने जा रही है। पौराणिक मान्यताओं के अनुसार सीताकुंड घाट का नाता रामायण काल से रहा है। कहा जाता है कि जब भगवान श्री राम वनवास के लिए निकले थे, तब माता सीता ने इसी घाट पर गोमती नदी के जल से अपने केश धोए थे। अब इस पावन और ऐतिहासिक घाट को करीब 4 करोड़ रुपये की लागत से पक्का और बेहद खूबसूरत बनाया जाएगा। पूरे क्षेत्र को 'गोमती कॉरिडोर' के रूप में विकसित किया जा रहा है, ताकि यहां आने वाले श्रद्धालुओं को आधुनिक सुविधाएं मिल सकें।

गोमती तट के विकास की बड़ी पहल

स्थानीय विधायक विनोद सिंह ने बताया कि शहर में गोमती नदी के तट को सुंदर और सुविधाजनक बनाने के लिए लंबे समय से गोमती कॉरिडोर परियोजना की मांग उठ रही थी। अब लगभग 3 करोड़ 75 लाख रुपये की भारी लागत से बनने वाला यह कॉरिडोर सुल्तानपुर शहर की पहचान को और निखार देगा। इस परियोजना के माध्यम से सीताकुंड घाट को न केवल आकर्षक और सुंदर बनाया जाएगा, बल्कि इसे पूरी तरह सुरक्षित भी किया जाएगा। उन्होंने कहा कि कॉरिडोर तैयार होने पर स्थानीय जनता के साथ-साथ दूर-दराज से आने वाले पर्यटकों को भी यहां शानदार अनुभव मिलेगा।

कॉरिडोर में होंगे ये प्रमुख कार्य

गोमती मित्र मंडल के अध्यक्ष मदन सिंह ने बताया कि इस परियोजना के तहत घाटों के सौंदर्यीकरण पर खास ध्यान दिया जा रहा है और इसके अंतर्गत कई महत्वपूर्ण काम कराए जाएंगे। गोमती नदी के जल तक आसानी से पहुंचने के लिए मजबूत और चौड़ी सीढ़ियां बनाई जाएंगी, ताकि त्योहारों के मौके पर श्रद्धालुओं को स्नान और पूजा-पाठ में कोई परेशानी न हो।

इसके साथ ही घाट पर आने वाली महिला श्रद्धालुओं की सुविधा और निजता को ध्यान में रखते हुए चेंजिंग रूम बनाए जाएंगे। पूरे परिसर में आधुनिक शौचालय, एक बड़ा हॉल और लोगों के बैठने की बेहतर व्यवस्था की जाएगी। शाम के समय घाट का नजारा भव्य और मनमोहक दिखे, इसके लिए पूरे कॉरिडोर क्षेत्र में सुंदर और रंग-बिरंगी लाइटिंग भी लगाई जाएगी।

श्रद्धालुओं को राहत, पर्यटन को बढ़ावा

स्थानीय निवासी सचिन कुमार श्रीवास्तव ने इस पहल पर खुशी जताते हुए कहा कि कॉरिडोर बनने से श्रद्धालुओं की वे तमाम दिक्कतें दूर हो जाएंगी, जिनका उन्हें अब तक सामना करना पड़ता था। खासकर बड़े धार्मिक आयोजनों, मेलों और त्योहारों के दौरान यहां आने वाली भारी भीड़ को अब बैठने, स्नान करने और बुनियादी सुविधाओं के लिए परेशान नहीं होना पड़ेगा।

घाट का कायाकल्प होने से सुल्तानपुर में धार्मिक पर्यटन को नया बढ़ावा मिलेगा और रोजगार के नए अवसर भी खुलेंगे। जिले के लोगों की सालों पुरानी यह मुराद अब धरातल पर उतरने को तैयार है।

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