'रात के एक बजे मैं उन पर चीख रहा था', मनोज वाजपेयी ने बताया वर्षों से दिल में दबा वह पछतावा

पर्दे पर सख्त किरदार निभाने वाले मनोज वाजपेयी ने एक टॉक शो में अपने करियर के शुरुआती दिनों का वह किस्सा साझा किया, जिसकी ग्लानि वे आज तक महसूस करते हैं। एक बुजुर्ग कैमरामैन से माफी न मांग पाने का मलाल उनके मन में आज भी है।

अपने अभिनय से बार-बार दर्शकों को प्रभावित करने वाले मनोज वाजपेयी आमतौर पर पर्दे पर गंभीर और सख्त किरदारों में नजर आते हैं, मगर असल जिंदगी में वे बेहद संवेदनशील इंसान हैं। हाल ही में एक टॉक शो में उन्होंने अपनी जिंदगी का एक ऐसा पन्ना खोला, जिसका दर्द वे वर्षों से अपने भीतर समेटे हुए थे। बातचीत के दौरान जब उन्हें अपने मन की बात कहने का मौका मिला, तो वे खुद को रोक नहीं पाए और एक पुरानी घटना को लेकर अपनी ग्लानि जाहिर कर दी।

'गवर्नर' को मिल रही सराहना

मनोज वाजपेयी की फिल्म 'गवर्नर' इन दिनों चर्चा में है। करीब 25 करोड़ रुपये की लागत से बनी यह फिल्म रिलीज के पांचवें दिन तक 5.26 करोड़ रुपये की कमाई कर पाई है। हालांकि बॉक्स ऑफिस के आंकड़े जो भी हों, थिएटर से बाहर निकलने वाले दर्शक फिल्म की जमकर तारीफ कर रहे हैं। खासकर आरबीआई के गवर्नर के किरदार में मनोज वाजपेयी के अभिनय को खूब पसंद किया जा रहा है।

शो में खुला दिल का राज

अभिनेता शेखर सुमन के शो में पहुंचे मनोज वाजपेयी ने अपनी जिंदगी का एक ऐसा किस्सा सुनाया, जो उनके असली स्वभाव को बयां करता है। शेखर सुमन ने बताया कि मनोज पिछले कई सालों से एक बात को लेकर ग्लानि महसूस करते आ रहे थे। जैसे ही उन्हें यह बात कहने का अवसर मिला, मनोज ने दिल के किसी कोने में दबे उस दर्द को सबके सामने रख दिया।

शूटिंग की वह रात

मनोज वाजपेयी ने बताया, ‘एक बार मैं सुबह से शाम तक शूटिंग कर रहा था। मुझे करीब एक ही सुर में 20 लाइन का डायलॉग बोलना था। वो एक सीरियल का सीन था। उस वक्त एक कैमरामैन थे केके महाजन। वो अपने जमाने के बहुत बड़े कैमरामैन थे। रात को करीब एक बजे मुझे बोला गया कि आपका शॉट है। इतने लंबे इंतजार के बाद जब शॉट देने के लिए बुलाया गया तो तब तक मेरा मूड खराब हो चुका था। इतने समय के इंतजार के बाद मैं भन्नाया हुआ था और जितनी लाइनों की प्रैक्टिस की थी, वो सब भूल गया था। डायलॉग बोलते वक्त मुझे वो लाइनें याद नहीं आ रही थीं, क्योंकि रात के एक बज चुके थे। जब भी कैमरा ऑन होता तो कभी पांच लाइन, कभी सात लाइन तो कभी आठ लाइन के बाद डायलॉग भूल जाता था।’

जब बुजुर्ग कैमरामैन से उलझ पड़े

अपनी बात आगे बढ़ाते हुए मनोज ने कहा, ‘इस पर अचानक केके महाजन चीखे। उन्होंने कहा कि कौन से ऐक्टर को लेकर आ गए हो, इसे ले जाओ और लाइन याद कराओ। जब वो मुझ पर चीखे तो मैं भी उन पर चीख पड़ा। उधर से वो फिर चीखे तो मैं लगातार चीखता रहा। मैं भूल चुका था कि सामने एक सीनियर और बुजुर्ग कैमरामैन हैं, मैंने सबके सामने उनकी बेइज्जती कर दी।’

आज तक नहीं गई कसक

मनोज वाजपेयी ने भावुक होते हुए कहा, ‘इस बात की ग्लानि मुझे हमेशा रही। जब तक मैंने सोचा कि उनसे मिलकर माफी मांगूंगा, तब तक वह गुजर गए। आज भी मुझे इसका मलाल है। यह कहने में मुझे कोई दिक्कत नहीं हो रही, बस पछतावा हो रहा है कि मैं उन्हें कभी सॉरी नहीं बोल पाया।’

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