ईरान और अमेरिका के बीच फिलहाल युद्ध थमा हुआ है और अगर शांति प्रस्ताव पर मुहर लग गई तो यह पूरी दुनिया के लिए बड़ी खबर साबित होगी। दोनों देशों के बीच हुए समझौते से लड़ाई लगभग खत्म हो चुकी है और भारी नुकसान झेलने के बावजूद दोनों पक्ष जीत का दावा ठोक रहे हैं। अब अगर 19 जून को जेनेवा में शांति समझौते पर हस्ताक्षर हो जाते हैं, तो यह एक अहम पड़ाव होगा।
हालांकि मौजूदा स्थिति कुछ ऐसी है जैसे शादी की रस्में तो पूरी हो गई हों, पर अंगूठी अभी तक नज़र नहीं आई हो। यह बात उन लोगों ने कही है जो सोमवार को अमेरिका और ईरान के बीच हुई उस अहम "डील-टू-डू-अ-डील" पर नज़र बनाए हुए थे।
अमेरिका-ईरान समझौते में क्या-क्या शामिल है?
दोनों में से किसी भी पक्ष ने समझौते का पूरा टेक्स्ट सार्वजनिक नहीं किया है, लेकिन अमेरिकी और सऊदी मीडिया के हवाले से जो जानकारी सामने आई है, उसके मुख्य बिंदु इस प्रकार हैं:
- लेबनान समेत सभी मोर्चों पर युद्ध को तुरंत और हमेशा के लिए खत्म करने की बात कही गई है, और दोनों पक्षों ने वादा किया है कि "अब से वे एक-दूसरे के खिलाफ कोई भी आक्रामक कार्रवाई नहीं करेंगे"।
- अमेरिका ईरानी बंदरगाहों पर लगी नौसैनिक नाकेबंदी हटाएगा और अंतिम समझौते के 30 दिनों के भीतर आसपास के इलाकों से अपनी सेना हटाने का वादा करता है।
- ईरान होर्मुज जलडमरूमध्य (Strait of Hormuz) से आवाजाही की अनुमति देने के लिए फौरन कदम उठाएगा।
- अमेरिका और उसके क्षेत्रीय सहयोगी ईरान के पुनर्वास और आर्थिक विकास के लिए एक "व्यापक योजना" तैयार करेंगे और कम से कम 300 अरब डॉलर की फंडिंग सुनिश्चित करेंगे।
- अमेरिका ईरान पर लगे सभी तरह के प्रतिबंध खत्म करने का वादा करता है, जिनमें UN सुरक्षा परिषद द्वारा लगाए गए प्रतिबंध भी शामिल हैं, और यह काम "अंतिम समझौते के तहत तय शेड्यूल के अनुसार" होगा।
- ईरान ने एक बार फिर दोहराया है कि वह कभी भी परमाणु हथियार नहीं बनाएगा और उसके संवर्धित पदार्थ (enriched material) तथा अन्य मुद्दों पर अंतिम समझौते में फैसला किया जाएगा।
- अमेरिका प्रतिबंध हटने की तारीख तक ईरानी तेल निर्यात के लिए छूट देगा।
- अमेरिका "अंतिम समझौते की दिशा में बातचीत की प्रगति को देखते हुए" ईरान के फ्रीज़ किए गए फंड और संपत्ति को जारी करने का वादा करता है।
शांति समझौते के बाद भी क्यों बनी रहेगी चिंता?
यह डील 100 से ज़्यादा दिनों तक चली उस लड़ाई के बाद हुई है, जिसकी शुरुआत 28 फरवरी को तेहरान पर अमेरिका और इज़राइल के हमलों से हुई थी। ट्रंप ने युद्ध को लेकर चेतावनी दी थी कि अगर ईरान को परमाणु हथियार मिले तो नरक बरसेगा।
भले ही शुक्रवार को वॉशिंगटन और तेहरान के बीच किसी फ्रेमवर्क समझौते पर औपचारिक रूप से हस्ताक्षर हो जाएं, लेकिन होर्मुज के ज़रिए वैश्विक ऊर्जा आपूर्ति को खतरे में डालने की ईरान की क्षमता एक बड़ी चिंता का सबब बनी रहेगी।
US-Iran MoU पर कब होंगे हस्ताक्षर?
US-Iran MoU पर आधिकारिक तौर पर हस्ताक्षर इसी शुक्रवार को स्विट्जरलैंड में किए जाएंगे। स्विस विदेश मंत्रालय के अनुसार, यह कार्यक्रम ल्यूसर्न के पास बर्गनस्टॉक रिज़ॉर्ट में होगा। जेनेवा में शुक्रवार को औपचारिक रूप से हस्ताक्षर होने की उम्मीद वाले इस समझौते का पूरा टेक्स्ट अभी जारी नहीं हुआ है, हालांकि बीते कुछ दिनों में इसकी असल सामग्री को लेकर मिली-जुली और अलग-अलग बातें सामने आई हैं।
MoU पर कौन करेगा हस्ताक्षर?
अमेरिकी अधिकारियों के मुताबिक, ट्रंप, वेंस और ईरान की संसद के स्पीकर मोहम्मद बाघेरी ग़ालिबाफ़ पहले ही इलेक्ट्रॉनिक रूप से इस डील पर साइन कर चुके हैं। ट्रंप का कहना है कि असली दस्तावेज़ पर वेंस हस्ताक्षर करेंगे, जबकि ईरानी मीडिया के अनुसार ग़ालिबाफ़ ईरान का प्रतिनिधित्व करेंगे।
दस्तावेज़ में क्या है?
किसी भी पक्ष ने आधिकारिक टेक्स्ट जारी नहीं किया है, लेकिन अमेरिकी और सऊदी मीडिया का कहना है कि यह 14-पॉइंट वाला मेमोरेंडम है, जिसमें सभी मोर्चों पर युद्ध समाप्त करने की बात कही गई है।
अमेरिका ने ईरान से क्या कहा?
अमेरिकी उपराष्ट्रपति वेंस ने कहा है कि अगर ईरान परमाणु हथियार न बनाने, होर्मुज जलडमरूमध्य (Strait of Hormuz) को खुला रखने और हथियारबंद समूहों को फंडिंग बंद करने जैसे कदम उठाकर "सही व्यवहार" करता है, तो उसे वॉशिंगटन-तेहरान समझौते के तहत "असली फ़ायदे" मिल सकते हैं।
किन मुद्दों पर बनी सहमति और किन्हें टाला गया?
ईरान की मेहर न्यूज़ एजेंसी के अनुसार, शांति समझौते के ड्राफ्ट में दोनों पक्षों को ईरान के परमाणु कार्यक्रम और उसके पास मौजूद 440 किलोग्राम (970 पाउंड) अत्यधिक संवर्धित यूरेनियम (highly enriched uranium) के भंडार पर अंतिम समझौते तक पहुंचने के लिए 60 दिन का समय दिया गया है। एजेंसी ने यह भी बताया है कि इस दौरान ईरान की फ्रीज़ की गई 24 अरब डॉलर की संपत्ति जारी की जाएगी। हालांकि, अमेरिका ने इनमें से किसी भी बात की पुष्टि नहीं की है।
अमेरिका-ईरान में किसने जीता युद्ध?
इस शांति समझौते से भले ही तीन महीने से ज़्यादा समय से चल रही लड़ाई थम गई हो, लेकिन इसने एक बड़ी बहस छेड़ दी है कि इस युद्ध से अमेरिकी ताकत के बारे में आखिर क्या पता चला। अमेरिका और इज़राइल के पास इस लड़ाई में ज़बरदस्त सैन्य बढ़त थी। अपने विमानों, सटीक निशाना साधने वाले हथियारों, खुफिया नेटवर्क और मिसाइल सिस्टम के दम पर वे ईरान में मौजूद ठिकानों पर हमला करने में कामयाब रहे, जबकि उन्हें बेहद कम पारंपरिक प्रतिरोध झेलना पड़ा। ईरान के नेतृत्व, सेना और परमाणु बुनियादी ढांचे को भारी नुकसान पहुँचा।
ईरान के लिए क्यों खास है होर्मुज?
अमेरिकी इंटेलिजेंस रिपोर्ट के मुताबिक, ईरान के पास अब जब चाहे तब 'स्ट्रेट ऑफ़ होर्मुज़' को बंद करने की ताकत है। समाचार एजेंसी सीएनएन ने मामले की जानकारी रखने वाले सूत्रों के हवाले से बताया कि US इंटेलिजेंस के एक आकलन में यह निष्कर्ष निकला है कि ईरान इस टकराव के बाद ऐसी क्षमता के साथ उभरा है जिससे वह जब चाहे 'स्ट्रेट ऑफ़ होर्मुज़' में रुकावट डाल सकता है या उसे बंद कर सकता है। यही वजह है कि होर्मुज़ ईरान का सबसे ताकतवर मोल-भाव करने का ज़रिया बन गया है।
जेनेवा में प्रस्तावित समझौता ज्ञापन के फ़्रेमवर्क समझौते के ऐलान के कुछ घंटों बाद ही ईरान के विदेश मंत्रालय ने कहा कि देश ट्रांज़िट टोल नहीं लगाएगा, लेकिन जलडमरूमध्य से गुज़रने वाले जहाज़ों से समुद्री सेवाओं के लिए शुल्क वसूलेगा। विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता इस्माइल बक़ाई ने सोमवार को कहा, "हमने हमेशा यही कहा है कि हम ट्रांज़िट टोल वसूलना नहीं चाहते, लेकिन नेविगेशन सेवाओं, पर्यावरण संरक्षण, जहाज़ के बीमा और अन्य ज़रूरी सेवाओं के लिए शुल्क लिया जाएगा।"
https://www.indiatv.in/explainers/who-won-war-between-us-and-iran-are-complications-arising-over-hormuz-explained-2026-06-17-1225640