रासायनिक खाद की किल्लत का तोड़: किसान ने लगाई वर्मी कंपोस्ट इकाई, सरकार से भी मिल रहा अनुदान

सिरोही के खारा गांव के किसान गेनाराम गरासिया ने डीएपी और यूरिया की कमी से निपटने के लिए अपने खेत में वर्मी कंपोस्ट यूनिट लगाई है, जिसके लिए सरकार की ओर से अनुदान भी मिला है।

सिरोही जिले में किसानों ने खरीफ की बुवाई की तैयारियां शुरू कर दी हैं। इस मौसम में डीएपी और यूरिया जैसे रासायनिक खादों की मांग अचानक बढ़ जाती है। नतीजतन कई स्थानों पर खाद की किल्लत और दुकानों के बाहर लंबी कतारें आम बात बन जाती हैं। इसी परेशानी का हल खोजते हुए जिले के खारा गांव के एक किसान ने अपने स्तर पर अनोखी पहल की है।

खेत में ही तैयार हो रही जैविक खाद

खारा गांव के किसान गेनाराम गरासिया ने रासायनिक खाद पर निर्भरता घटाने के लिए अपने खेत में वर्मी कंपोस्ट यूनिट स्थापित की है। इस इकाई में केंचुआ खाद तैयार की जा रही है, जो खेती के लिए पूरी तरह जैविक और लाभकारी विकल्प साबित हो रही है। बुवाई के समय बाजार में खाद के लिए भटकने के बजाय अब इस किसान को अपने ही खेत से जरूरत का बड़ा हिस्सा मिल जाता है।

लागत और सरकारी अनुदान

कृषि विभाग के सहयोग से बनी इस इकाई पर कुल 1.30 लाख रुपये की लागत आई है। इसमें से 50 हजार रुपये की अनुदान राशि सरकार की ओर से मिली है, जिससे किसान पर आर्थिक बोझ कम रहा। विभागीय मार्गदर्शन के चलते इकाई को सही तरीके से तैयार और संचालित किया जा सका।

डीएपी की कमी का भी समाधान

किसान ने डीएपी की कमी से उबरने का रास्ता भी निकाल लिया है। जरूरत पड़ने पर गोबर खाद में रॉक फॉस्फेट मिलाकर डीएपी की कमी को पूरा किया जा रहा है। इस तरीके से खेत को आवश्यक पोषक तत्व मिल जाते हैं और रासायनिक खाद की जरूरत भी काफी हद तक घट जाती है।

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