पूर्णिया: एक परिवार के दुख ने जगाई चेतना, गांव ने पंचनामा बनाकर किया मृत्यु भोज का सामूहिक बहिष्कार

पूर्णिया के मरंगा बिंद टोला वार्ड नंबर 8 के ग्रामीणों ने मृत्यु भोज प्रथा का सामूहिक बहिष्कार करने का ऐतिहासिक फैसला लिया है। एक ही परिवार में मां और बेटे की मौत के बाद कर्ज और सामाजिक दबाव से जूझ रहे परिवार की पीड़ा देखकर गांव वालों ने पंचनामा तैयार कर इस कुरीति को समाप्त करने का संकल्प लिया।

पूर्णिया जिले के बिंद टोला ने पूरे समाज के सामने एक मिसाल पेश की है। यहां के मरंगा बिंद टोला वार्ड नंबर 8 के ग्रामीणों ने मृत्यु भोज प्रथा का पूरी तरह सामूहिक बहिष्कार करने का ऐतिहासिक निर्णय लिया है। ग्रामीणों ने एकजुट होकर पंचायत बैठाई और सर्वसम्मति से संकल्प लेते हुए पंचनामा तैयार कर इस फैसले को औपचारिक रूप दिया।

एक परिवार पर टूटा दुखों का पहाड़

दरअसल, कुछ दिन पहले गांव के एक ही परिवार में मां और बेटे की मौत हो गई। इसके बाद घर के बूढ़े पिता और एक बाई पर आर्थिक और पारिवारिक संकट का पहाड़ टूट पड़ा। कर्ज लेकर इलाज कराने के कारण परिवार पूरी तरह टूट चुका था। ऐसे कठिन समय में परिवार पर मृत्यु भोज आयोजित करने का सामाजिक दबाव भी बनने लगा था।

इसी पीड़ा को देखते हुए सराहनीय पहल करते हुए वार्ड नंबर 8 के ग्रामीणों ने सामूहिक रूप से मृत्यु भोज का पूर्ण बहिष्कार करने का ऐतिहासिक फैसला लिया।

कैसे लिया गया यह साहसिक फैसला

कर्ज और सामाजिक दबाव के बीच गांव के बुद्धिजीवी और समाजसेवी लोग एकजुट हुए। स्थानीय सुरेंद्र यादव, दिनेश यादव, प्रेमचंद यादव, उमेश यादव, प्रदीप यादव, अरुण यादव, मिथिलेश यादव और वार्ड के पूर्व पार्षद ललन यादव (लल्लू यादव) सहित कई लोग शोकाकुल परिवार से मिलने पहुंचे।

पीड़ित परिवार की पीड़ा सुनने के बाद स्थानीय लोगों ने बीते दिन गांव में एक महत्वपूर्ण आमसभा बुलाई। आमसभा में चर्चा के बाद ग्रामीणों ने सर्वसम्मति से तय किया कि आज से गांव का कोई भी परिवार मृत्यु भोज का आयोजन नहीं करेगा। इस निर्णय को औपचारिक रूप देने के लिए पंचनामा तैयार किया गया, जिस पर गांव के दर्जनों लोगों ने हस्ताक्षर कर अपनी सहमति दर्ज कराई।

आर्थिक और सामाजिक बोझ बनती परंपरा

स्थानीय ग्रामीणों का कहना है कि किसी व्यक्ति की मृत्यु के बाद परिवार पहले से ही गहरे शोक और मानसिक तनाव से गुजर रहा होता है। ऐसे समय में मृत्यु भोज की परंपरा उनके लिए अतिरिक्त आर्थिक और सामाजिक बोझ बन जाती है। आर्थिक रूप से कमजोर परिवारों को मृत्यु भोज के लिए कर्ज तक लेना पड़ता है और कई बार अपनी जमीन तक बेचनी पड़ती है।

जीते जी करें माता-पिता की सेवा

मौके पर मौजूद ललन यादव ने कहा कि उनके माता-पिता दोनों जीवित हैं और उनके निधन पर वे मृत्यु भोज का आयोजन नहीं करेंगे, यह उनका संकल्प है। ग्रामीणों ने बताया कि इस पहल का एकमात्र उद्देश्य समाज में फैली उन कुरीतियों को समाप्त करना है, जो शोकाकुल परिवारों की मुश्किलें और बढ़ा देती हैं।

ग्रामीणों ने आम लोगों से अपील करते हुए कहा कि पूर्णिया के मरंगा बिंद टोला की यह पहल आने वाले दिनों में अन्य गांवों और समाज के लिए भी प्रेरणा का स्रोत बनेगी। लल्लू यादव ने लोगों से अपील की कि वे जीते जी अपने माता-पिता का विशेष ख्याल रखें, ताकि उनके निधन के बाद किसी प्रकार का पछतावा न रहे।

https://hindi.news18.com/news/bihar/purnia-purnea-maranga-bind-tola-villagers-sign-panchnama-to-ban-mrityu-bhoj-tradition-local18-ws-l-10579236.html