परीक्षा की कॉपियों की जांच अब शिक्षक नहीं, बल्कि आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस करे — यह कल्पना अब हकीकत बनती दिख रही है। बिहार के अररिया जिले के रहने वाले आशीष मंडल और उनकी टीम ने एआई पर आधारित एक प्लेटफॉर्म एकेडाइन (Acadine) तैयार किया है, जो स्कूल और कॉलेजों की उत्तरपुस्तिकाओं की तेज और सटीक जांच का दावा करता है। खास बात यह है कि यह सिर्फ अंक ही नहीं देता, बल्कि छात्रों को यह भी बताता है कि उनके नंबर किस वजह से काटे गए।
चर्चा में क्यों है यह प्लेटफॉर्म
इन दिनों सीबीएसई की कॉपी जांच प्रक्रिया को लेकर कई सवाल खड़े हो रहे हैं और मूल्यांकन के तरीके पर लगातार बहस छिड़ी हुई है। ऐसे ही समय में आशीष मंडल की टीम का तैयार किया एकेडाइन प्लेटफॉर्म सामने आया है, जो आंसर शीट की जांच को तेज और भरोसेमंद बनाने का दावा करता है। इसकी सबसे बड़ी विशेषता यह है कि कॉपी जांचने का काम एआई करता है और किसी सवाल में अंक कटने पर उसकी वजह भी स्पष्ट रूप से बताई जाती है, ताकि छात्र और अभिभावक दोनों आसानी से समझ सकें कि कमी कहां रही।
एकेडाइन के सीईओ आशीष मंडल का कहना है कि यह प्लेटफॉर्म बेहद सटीक तरीके से कॉपियों की जांच करता है और इसमें गलती की गुंजाइश न के बराबर है। उनके मुताबिक, यह बहुत कम समय में बड़ी संख्या में कॉपियां जांच सकता है। उनका यह भी दावा है कि अगर सीबीएसई मौका दे तो उनका प्लेटफॉर्म दूसरे विकल्पों की तुलना में कम खर्च में बेहतर सेवा देने में सक्षम है।
शिक्षक नहीं, अब एआई जांचेगा कॉपी
आशीष बताते हैं कि भारत में आज भी ज्यादातर परीक्षाएं लिखित रूप में होती हैं, जिनकी जांच में शिक्षकों का काफी समय लगता है और बारीकी से छात्रों की कमजोरियां भी नहीं बताई जा पातीं। नतीजा यह होता है कि असली कमजोरी का समाधान नहीं हो पाता। इसी चुनौती को ध्यान में रखकर उनकी टीम ने एकेडाइन तैयार किया, जो बहुत कम समय में जांच और फीडबैक दोनों उपलब्ध कराता है।
उनका दावा है कि एआई द्वारा किया गया मूल्यांकन शिक्षकों के मुकाबले अधिक सटीक होता है, इसमें गलती की संभावना बहुत कम रहती है और साथ ही समय व खर्च की भी बचत होती है।
कैसे काम करता है एकेडाइन
आशीष मंडल के अनुसार, परीक्षा समाप्त होने के बाद स्कूल या कॉलेज छात्रों की उत्तरपुस्तिकाओं को स्कैन करके एकेडाइन प्लेटफॉर्म पर अपलोड करते हैं। कॉपी अपलोड होते ही एआई जांच शुरू कर देता है और कुछ ही समय में परिणाम तैयार हो जाता है। उनका कहना है कि प्लेटफॉर्म की सटीकता करीब 98 प्रतिशत तक है।
किसी भी संस्थान को डेमो देते समय एक खास सुविधा भी दी जाती है — संस्थान चाहे तो उसी कॉपी की जांच किसी शिक्षक से भी करवा सकता है और फिर दोनों परिणामों की तुलना कर सकता है। इससे प्लेटफॉर्म की कार्यक्षमता और सटीकता को आसानी से परखा जा सकता है।
आशीष के मुताबिक, इस प्लेटफॉर्म की सबसे बड़ी खूबी सिर्फ अंक देना नहीं, बल्कि अंक कटने की वजह बताना है। अगर एआई ने किसी सवाल में कम अंक दिए हैं तो वह यह भी स्पष्ट करता है कि जवाब में कौन-सी कमी या गलती रह गई। इससे छात्रों और शिक्षकों दोनों को यह समझने में मदद मिलती है कि उत्तर में सुधार की गुंजाइश कहां है।
सीबीएसई की प्रणाली से बेहतर होने का दावा
आशीष मंडल अपने प्लेटफॉर्म को सीबीएसई की मौजूदा कॉपी जांच प्रणाली से ज्यादा सटीक और प्रभावी बताते हैं। उनका कहना है कि इस बार सीबीएसई की मूल्यांकन प्रक्रिया में मानवीय गलतियां देखने को मिली हैं और कॉपी स्कैन करने से लेकर मूल्यांकन तक अलग-अलग स्तरों पर त्रुटियां सामने आई हैं, जिससे सीबीएसई पर सवाल उठ रहे हैं।
उनके अनुसार, मौजूदा व्यवस्था की सबसे बड़ी कमी यह है कि अंक काटे जाने का स्पष्ट कारण नहीं बताया जाता। शिक्षक कॉपी तो जांचते हैं, लेकिन छात्र यह नहीं जान पाते कि उनके उत्तर में क्या कमी रही, और अलग-अलग शिक्षकों के मूल्यांकन में अंतर भी देखने को मिल सकता है।
आशीष का दावा है कि एकेडाइन इन कमियों को दूर करता है। यहां सभी उत्तरपुस्तिकाओं की जांच एआई करता है, जिससे मूल्यांकन एक समान मानकों पर होता है। साथ ही अंक काटे जाने पर उसका कारण भी विस्तार से बताया जाता है, जिससे छात्रों को अपनी गलतियां समझने और उन्हें सुधारने में आसानी होती है।
65 लाख की नौकरी छोड़कर शुरू किया सफर
अररिया जिले के रहने वाले आशीष मंडल ने वर्ष 2020 में आईआईटी इंदौर से कंप्यूटर साइंस में ग्रेजुएशन पूरा किया था। पढ़ाई के बाद उन्होंने एक निजी कंपनी में नौकरी शुरू की और सितंबर 2025 में जब उन्होंने यह नौकरी छोड़ी, तब उनका सालाना पैकेज करीब 65 लाख रुपये था। उन्हें शिक्षा और मूल्यांकन के क्षेत्र में एआई की बड़ी संभावनाएं नजर आईं, इसी वजह से उन्होंने अपने कुछ दोस्तों के साथ मिलकर नया प्लेटफॉर्म बनाने का फैसला किया।
आशीष बताते हैं कि उनकी टीम ने कुछ ही महीनों में एकेडाइन तैयार कर लिया और दिसंबर 2025 में इसे लॉन्च किया। उनका दावा है कि फिलहाल देशभर के 66 से अधिक शिक्षण संस्थान इस प्लेटफॉर्म का इस्तेमाल कर रहे हैं। जम्मू से लेकर कोयंबटूर तक कई स्कूल, कॉलेज और कोचिंग संस्थान इससे जुड़े हुए हैं, जबकि दिल्ली, महाराष्ट्र और गुजरात जैसे राज्यों में भी कई संस्थान इस तकनीक का उपयोग कर रहे हैं।
आगे क्या है योजना
आशीष के मुताबिक, अभी प्लेटफॉर्म का मुख्य फोकस कॉपी जांच पर है, लेकिन आने वाले समय में इसमें होमवर्क, असाइनमेंट, पीपीटी, नोट्स और दूसरे शैक्षणिक कार्यों के मूल्यांकन से जुड़े कई नए फीचर जोड़े जाएंगे। उनका मानना है कि एआई आधारित मूल्यांकन प्रणाली ही शिक्षा क्षेत्र का भविष्य है और आने वाले वर्षों में इसका इस्तेमाल तेजी से बढ़ेगा।
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