पांचना बांध विवाद: पानी की मांग अब जातीय वर्चस्व की जंग में बदली, जानें पूरा मामला

राजस्थान के करौली और सवाई माधोपुर के बीच पांचना बांध के पानी को लेकर दो दशक पुराना विवाद फिर भड़क उठा है। यह झगड़ा अब मीणा और गुर्जर समाज के बीच वर्चस्व की लड़ाई का रूप लेता दिख रहा है।

राजस्थान के करौली जिले में बना पांचना बांध एक बार फिर सुर्खियों में है। इस बांध के पानी को लेकर करीब दो दशक से खींचतान चल रही है, पर आज तक कोई स्थायी हल नहीं निकल सका। बीते एक मई को उच्च न्यायालय ने तीन सप्ताह के भीतर बांध से नहरों में पानी छोड़ने का आदेश दिया, जिसके बाद यह मसला दोबारा चर्चा के केंद्र में आ गया।

हालात यह हैं कि पानी की यह मांग अब महज सिंचाई का मुद्दा नहीं रह गई, बल्कि दो समुदायों के बीच वर्चस्व की लड़ाई में तब्दील होती दिख रही है। एक ओर मीणा पट्टी के किसान हैं तो दूसरी ओर गुर्जर पट्टी के, और दोनों लगभग आमने-सामने आ खड़े हुए हैं।

दो जिलों के बीच उलझा पानी

पांचना बांध के कमांड एरिया में कुल 35 गांव आते हैं। इनमें करौली जिले के साथ-साथ इससे सटे सवाई माधोपुर जिले के गंगापुर सिटी विधानसभा क्षेत्र के गांव भी शामिल हैं। कमांड एरिया वाले ये गांव चाहते हैं कि बांध की नहरों से उनके खेतों तक पानी पहुंचे।

दूसरी ओर करौली जिले में बांध के आसपास बसे 39 अन्य गांवों के किसानों की मांग है कि नहर का पानी पहले उन्हें मिले और उनकी आवश्यकता पूरी होने के बाद ही दूसरों को दिया जाए। इसी टकराव के कारण नहरों में पानी छोड़ा नहीं जा सका है।

13 दिन से महापड़ाव, रेल रोकने की चेतावनी

कमांड एरिया के 35 गांवों के लोग अपनी मांग को लेकर 13 दिन से गंगापुर सिटी इलाके के खंडीप गांव में महापड़ाव डाले बैठे हैं। 5 जून से जमे ये किसान सोमवार, मंगलवार और बुधवार को लगातार तीन दिन रेलवे ट्रैक भी जाम कर चुके हैं। इनकी मांग है कि नहरों में पानी छोड़ा जाए।

कमांड एरिया के गांवों की ओर से बांध के निर्माण कार्य से लेकर अब तक यह लड़ाई गंगापुर सिटी विधायक रामकेश मीणा लड़ते आ रहे हैं, लेकिन सिंचाई के लिए आज तक बांध की नहर से पानी नहीं मिल सका। वहीं डाउनस्ट्रीम के 39 गांवों के किसान 15 मई से पांचना बांध पर धरना दिए बैठे हैं।

खंडीप में जमे ग्रामीणों ने 28 जून को रेल रोकने की चेतावनी भी दे रखी है। गंगापुर सिटी में पूरे आंदोलन की कमान विधायक रामकेश मीणा संभाल रहे हैं, जबकि डाउनस्ट्रीम के 39 गांवों की पंचायती की अगुवाई गुर्जर समाज के अशोक सिंह धाबाई कर रहे हैं।

जातीय रंग लेता विवाद

इस झगड़े ने अब जातिगत स्वरूप भी ले लिया है। गंगापुर सिटी में मीणा समाज इस लड़ाई को लड़ रहा है तो दूसरी ओर करौली जिले का गुर्जर समाज अपनी मांग पर अड़ा हुआ है। ऐसे में यह संघर्ष केवल बांध के पानी तक सीमित न रहकर दो समुदायों के वर्चस्व की लड़ाई बनता जा रहा है।

क्या है पूरा विवाद

इस बांध का निर्माण कार्य 1978 में शुरू हुआ था। उस समय इसे एशिया का मिट्टी का सबसे बड़ा बांध बनाने की योजना थी, लेकिन बाद में इसे पक्का बनाया गया। इस पर करीब 130 करोड़ रुपये की लागत आई और इसका निर्माण 2004-05 में पूरा हुआ।

बांध से 2005 में सिर्फ एक बार नहरों में पानी छोड़ा गया था, उसके बाद कभी नहीं छोड़ा गया। करौली जिला मुख्यालय के समीप स्थित पांचना बांध की कुल भराव क्षमता 258.62 मीटर यानी 2100 एमसीएफटी है। बांध से करौली और सवाई माधोपुर (गंगापुर सिटी क्षेत्र) जिलों के कमांड क्षेत्र के 35 गांवों की करीब 9985 हैक्टेयर भूमि को सिंचित करने का लक्ष्य रखा गया था, पर 2005 के बाद से अब तक सिंचाई के लिए पानी नहीं छोड़ा जा सका।

इसके पीछे बड़ी वजह डाउनस्ट्रीम के 39 गांवों के किसानों की यह मांग है कि पहले पानी उन्हें मिले। इन किसानों का कहना है कि बांध निर्माण के दौरान उनकी जमीन और खेत चले गए, इसलिए पहला हक उनका है। वहीं कमांड क्षेत्र के किसान लगातार पानी छोड़ने की मांग पर डटे हैं। शासन-प्रशासन ने दोनों पक्षों में सहमति बनाने के कई प्रयास किए, पर सफलता नहीं मिली। अब हाईकोर्ट के आदेश के बाद मामला फिर गरमा गया है।

तीसरे पक्ष के रूप में गंभीर नदी तट के किसान

कमांड एरिया वाले गांवों से पहले 15 मई को बांध के डाउनस्ट्रीम वाले करौली जिले के 39 गांवों के किसानों की पांचना बांध पर महापंचायत हुई थी। इसमें किसानों ने एक स्वर में पहले अपने क्षेत्र के 39 गांवों को पानी देने की मांग दोहराई और उसी दिन से बांध पर निगरानी के लिए धरने पर बैठ गए। गांववार दिया जा रहा यह धरना 30 जून तक निर्धारित किया गया है।

इसी बीच तीसरे पक्ष के रूप में गंभीर नदी तट के किसान और ग्रामीण भी बांध से पानी उपलब्ध कराने की मांग कर रहे हैं। उल्लेखनीय है कि पांचना बांध गंभीरी नदी पर बना है।

लिफ्ट परियोजना से भी नहीं सुलझी समस्या

इस विवाद को सुलझाने के लिए राज्य सरकार ने गुड़ला-पांचना लिफ्ट परियोजना का निर्माण कराया था। लेकिन बांध के समीपवर्ती किसानों का कहना है कि इस परियोजना से क्षेत्र के सभी गांवों के खेतों तक पानी नहीं पहुंच पा रहा, साथ ही परियोजना का काम भी घटिया स्तर का हुआ है।

अब सरकार ने इस परियोजना को पूरा कराने और वंचित गांवों को पानी पहुंचाने के लिए इसी बजट में 50 करोड़ रुपये की राशि का प्रावधान किया है, जिसकी डीपीआर का काम चल रहा है। गंगापुर सिटी क्षेत्र के खंडीप गांव में चल रही महापंचायत में रोज एक गांव को जिम्मेदारी सौंपी जाती है। वहां से हजारों की संख्या में किसान पहुंचते हैं और 24 घंटे ड्यूटी निभाते हैं, जिनके खाने-पीने और नाश्ते की व्यवस्था मौके पर ही की जा रही है।

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