मानसून ने बीच रास्ते में क्यों थामी रफ्तार, मौसम वैज्ञानिकों की बढ़ी चिंता

तेज शुरुआत के बाद दक्षिण-पश्चिम मानसून में आई अचानक सुस्ती ने वैज्ञानिकों को चिंतित कर दिया है। 4 से 16 जून के बीच मध्य भारत में करीब 65 प्रतिशत बारिश की कमी दर्ज की गई है।

देश में दक्षिण-पश्चिम मानसून ने शुरुआत में जिस तेजी से दस्तक दी थी, उसके बाद अचानक आई सुस्ती ने मौसम वैज्ञानिकों की चिंता बढ़ा दी है। आसमान से ली गई सैटेलाइट तस्वीरें इस ठहराव की पुष्टि कर रही हैं, जिनमें मध्य और पश्चिम भारत के बड़े हिस्सों में मानसूनी बादलों की साफ कमी दिखाई दे रही है।

बारिश में भारी कमी

भारतीय मौसम विभाग के आंकड़ों के मुताबिक 4 से 16 जून के बीच मध्य भारत में करीब 65 प्रतिशत बारिश की कमी दर्ज की गई है। तेज आगाज के बाद इस तरह अचानक रफ्तार थमने ने मौसम का पूर्वानुमान लगाने वालों को असमंजस में डाल दिया है।

आखिर क्यों थमी रफ्तार

विशेषज्ञों के अनुसार मानसून की इस सुस्ती के पीछे कई कारण एक साथ काम कर रहे हैं। बंगाल की खाड़ी में कोई मजबूत लो-प्रेशर सिस्टम न बन पाना, मानसून ट्रफ का कमजोर रहना और अल नीनो का प्रभाव—इन सभी ने मिलकर मानसून की गति पर ब्रेक लगा दिया है।

किसानों के लिए अहम दो हफ्ते

आने वाले दो सप्ताह किसानों और खरीफ फसलों के लिहाज से बेहद महत्वपूर्ण माने जा रहे हैं। जानकारों का मानना है कि अगर मानसून जल्द दोबारा सक्रिय नहीं हुआ तो इसका सीधा असर कृषि और जल संसाधनों पर पड़ सकता है।

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