कानपुर: फीलखाना थाना क्षेत्र में हुए मनीष गुप्ता हत्याकांड ने पूरे शहर को हिलाकर रख दिया है। एक ओर अपने बेटे की अर्थी उठाने का दर्द झेल रहे पिता की आंखें नम हैं, तो दूसरी ओर छह साल का मासूम रियांश अब तक इस सच्चाई से अनजान है कि उसके सिर से पिता का साया हमेशा के लिए हट चुका है। उस नन्हे बच्चे की जुबान पर बस एक ही सवाल है — "मेरे पापा कब आएंगे?"
मनीष गुप्ता की मौत के बाद उनके घर में मातम पसरा है। रिश्तेदारों और पड़ोसियों के आने-जाने का सिलसिला जारी है, मगर घर के सबसे छोटे सदस्य रियांश को इस पूरी त्रासदी का अंदाजा तक नहीं है। वह कभी अपने दादा का हाथ थामे घर में टहलता है, तो कभी हर आने वाले से पूछ बैठता है कि उसके पापा कहां गए और उसकी मां कब वापस आएगी।
मनीष हत्याकांड की पूरी कहानी
फीलखाना में यह वारदात 5 जून की है। नौ साल पहले प्रेम विवाह करने वाली निहारिका ने अपने मासूम बेटे के सामने ही अपने व्यापारी पति, 42 वर्षीय मनीष गुप्ता को चाकू से गोद दिया। बुरी तरह घायल हालत में मनीष अपने बेटे को साथ लेकर करीब 500 मीटर दूर स्थित फीलखाना थाने पहुंचे और पुलिस को पूरी जानकारी दी। पुलिस ने उन्हें अस्पताल में भर्ती कराया, लेकिन मंगलवार को हैलट में उनकी मौत हो गई। परिजनों के मुताबिक, निहारिका किसी पुरुष मित्र से बात करती थी, जिसका मनीष विरोध करते थे और इसी रंजिश में वारदात को अंजाम दिया गया। पुलिस ने हत्या का मुकदमा दर्ज कर लिया है।
दो दिन पहले ही मॉल से चाकू लाई थी निहारिका
परिजनों के अनुसार, घटना वाले दिन घर के भीतर पति-पत्नी के बीच कथित तौर पर पत्नी के अपने प्रेमी से फोन पर बात करने को लेकर विवाद हुआ था। आरोप है कि यह झगड़ा देखते ही देखते इतना बढ़ गया कि निहारिका ने रसोई में इस्तेमाल होने वाले चाकू से मनीष पर हमला कर दिया। मासूम के मुताबिक यह चाकू दो दिन पहले ही उसकी मां एक मॉल से लेकर आई थी, जिसी से वारदात को अंजाम दिया गया। हमले के बाद गंभीर रूप से घायल मनीष को अस्पताल पहुंचाया गया, लेकिन इलाज के दौरान उनकी जान नहीं बचाई जा सकी।
छह साल के मासूम की जुबानी सामने आई दर्दनाक दास्तान
घटना के बाद बच्चे ने पुलिस को बताया कि मां ने पापा को चाकू मारा है, जिसके आधार पर पुलिस ने आरोपी पत्नी को हिरासत में लेकर जेल भेज दिया। इस पूरे मामले का सबसे पीड़ादायक पहलू मासूम रियांश की बातें हैं। परिवार और मीडिया के सामने उसने जो कुछ कहा, उसने सबको भावुक कर दिया। बच्चे का कहना है कि उसकी मां अक्सर किसी व्यक्ति से फोन पर बात करती थीं और इसी को लेकर घर में अनबन होती थी। मासूम ने अपनी आंखों के सामने घटे घटनाक्रम का जिक्र करते हुए बताया कि झगड़े के दौरान उसकी मां ने पिता पर चाकू से वार किया।
पुलिस फिलहाल मामले की जांच कर रही है और हर पहलू की पड़ताल में जुटी है, मगर इस वारदात ने एक हंसते-खेलते परिवार को पूरी तरह बिखेर दिया है। पिता की मौत और मां के जेल जाने के बाद अब सबसे बड़ा सवाल मासूम रियांश के भविष्य को लेकर खड़ा हो गया है।
परिजनों से पूछता रहा- पापा कब घर आएंगे?
मनीष के अंतिम संस्कार के समय भी रियांश को यह नहीं बताया गया कि कफन में लिपटा शव उसके पिता का है। वह लगातार अपने परिजनों से यही पूछता रहा कि "पापा कब घर आएंगे?" उसके इस मासूम सवाल का जवाब किसी के पास नहीं था। पिता की चिता जलने के बाद भी वह अपनी मां के लौटने का इंतजार करता रहा।
पिता को खो बैठा मासूम, मां सलाखों के पीछे
इस हृदयविदारक घटना के बाद पड़ोसियों का कहना है कि इस वारदात ने पूरे इलाके को सन्न कर दिया है। हर किसी के मन में बस यही सवाल है कि आखिर उस छोटे-से बच्चे का क्या कसूर था, जिसने एक ही दिन में अपने पिता को खो दिया और उसकी मां सलाखों के पीछे पहुंच गई। फिलहाल पुलिस इस मामले में कानूनी कार्रवाई आगे बढ़ा रही है, जबकि रियांश की मासूम आंखें अब भी अपने माता-पिता को तलाश रही हैं। यह सिर्फ एक हत्या की कहानी नहीं, बल्कि एक ऐसे परिवार के टूटने की दास्तान है, जिसकी सबसे भारी कीमत छह साल का एक मासूम चुका रहा है।
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