नालंदा में अनोखी चोरी: पोल्ट्री फार्म से उड़ा ले गए 2500 मुर्गियां, उस रात पहरेदार बेटा परीक्षा देने गया था

बिहार के नालंदा जिले के सिलाव प्रखंड में चोरों ने एक पोल्ट्री फार्म से 2500 मुर्गियां चुरा लीं। जिस रात यह वारदात हुई, फार्म पर पहरा देने वाला बेटा सिपाही भर्ती परीक्षा देने गया हुआ था।

नालंदा: बिहार के नालंदा से एक हैरान कर देने वाली घटना सामने आई है, जहां एक पोल्ट्री फार्म से 2500 मुर्गियां चोरी हो गईं। इतनी बड़ी तादाद में मुर्गियों की चोरी की चर्चा अब पूरे इलाके में है और हर कोई यही जानने की कोशिश में लगा है कि आखिर चोरों ने इस वारदात को अंजाम किस तरह दिया।

पूरा मामला क्या है?

बीते कुछ समय में चोरी की कई वारदातें सामने आ चुकी हैं। कभी एटीएम मशीन उड़ा ली जाती है तो कभी मोबाइल टावर के उपकरण गायब कर दिए जाते हैं। लेकिन नालंदा में जो हुआ वह अपने आप में अलग है, क्योंकि यहां पूरी 2500 मुर्गियां ही चुरा ली गईं। यह घटना जिले के सिलाव प्रखंड के शुरूमपुर गांव की है, जहां मंटू सिंह नाम के व्यक्ति ने मुर्गी पालन का फार्म खोल रखा था।

इस फार्म की रखवाली के लिए रात के समय पिता और पुत्र बारी-बारी से पहरा देते थे। लेकिन रविवार को बेटा सिपाही भर्ती परीक्षा देने के लिए चला गया, वहीं पिता रात में राजगीर मेला देखने निकल गए। अगली सुबह जब वे फार्म पर लौटे तो दो-चार मुर्गियां बाहर घूमती दिखाई दीं और फार्म का ताला टूटा हुआ था।

अंदर रखी सभी 2500 मुर्गियां गायब थीं। पीड़ित मंटू सिंह ने इस संबंध में सिलाव थाने में आवेदन दिया है। यह वारदात इलाके में चर्चा का विषय बनी हुई है और लोग हैरान हैं कि इतनी बड़ी संख्या में मुर्गियों की चोरी कैसे हुई, उन्हें किस वाहन से ले जाया गया और इस काम में कितने लोग शामिल रहे होंगे। सूचना मिलते ही पुलिस मामले की जांच में जुट गई है।

पोल्ट्री फार्म आखिर होता क्या है?

पोल्ट्री फार्म वह स्थान होता है जहां बड़ी संख्या में मुर्गियों का पालन किया जाता है। अंडे और मांस का कारोबार करने के मकसद से लोग ऐसे फार्म खोलते हैं। इनमें अंडे देने वाली मुर्गियों को आमतौर पर 1.5-2 साल तक रखा जाता है, जबकि मांस के लिए मुर्गियों को 6-7 हफ्ते में तैयार कर लिया जाता है। इसके अलावा अच्छी नस्ल के चूजे तैयार करने के लिए भी पोल्ट्री फार्म चलाए जाते हैं।

आधुनिक पोल्ट्री फार्म में बड़े-बड़े शेड बने होते हैं और ऑटोमैटिक फीडिंग, वॉटरिंग तथा वेंटिलेशन की व्यवस्था रहती है। बीमारियों से बचाव के लिए यहां सख्त बायोसिक्योरिटी का इंतजाम भी किया जाता है। इन फार्मों में चूजों से लेकर वयस्क मुर्गियों तक का पूरा चक्र चलता है और वैज्ञानिक ढंग से उनके पोषण व देखभाल का ध्यान रखा जाता है।

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