अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप एक बार फिर ऐसा कदम उठा सकते हैं, जिससे भारत की चुनौतियां बढ़ सकती हैं। जी7 समिट में बोलते हुए ट्रंप ने कहा कि अमेरिका जल्द ही रूसी तेल शिपमेंट पर कड़े प्रतिबंध दोबारा लागू करने की योजना बना रहा है, क्योंकि मिडिल ईस्ट में आपूर्ति के रास्ते अब स्थिर हो रहे हैं। यह घटनाक्रम भारत के लिए चिंता बढ़ाने वाला है, क्योंकि भारत बड़ी मात्रा में तेल रूस से खरीद रहा है। हालांकि ट्रंप के दबाव के बावजूद भारत ने अब तक रूसी तेल की खरीद नहीं रोकी है।
प्रतिबंधों में अस्थायी ढील क्यों दी गई थी
ईरान के साथ तनाव के दौर में ऊर्जा की कीमतों में भारी उछाल से वैश्विक बाजार को बचाने के लिए इमरजेंसी छूट के जरिये इन प्रतिबंधों में कुछ समय के लिए राहत दी गई थी। ट्रंप का कहना है कि जब स्ट्रेट ऑफ होर्मुज से कमर्शियल कच्चे तेल की आपूर्ति भरोसेमंद तरीके से दोबारा शुरू हो जाएगी, तो ये उपाय फिर से लागू कर दिए जाएंगे। माना जा रहा है कि इस कदम का मकसद रूस की कमाई के एक अहम जरिये को निशाना बनाकर उस पर दबाव बढ़ाना है।
भारत कितना तेल खरीद रहा है
केप्लर (Kpler) के हालिया आंकड़ों के अनुसार, भारत रूस से बड़ी मात्रा में कच्चा तेल खरीदना जारी रखे हुए है। जून 2026 में भारत का रूसी कच्चे तेल का आयात लगभग 18 से 20 लाख बैरल प्रतिदिन के आसपास रहने का अनुमान है, जो भारत के कुल समुद्री कच्चे तेल आयात का करीब 35% से 40% हिस्सा बनता है। रूस लगातार भारत का सबसे बड़ा और प्रमुख तेल आपूर्तिकर्ता बना हुआ है, जबकि इराक, सऊदी अरब और यूएई इसके बाद आते हैं।
छूट घटी, फिर भी खरीद जारी
केप्लर के आंकड़ों से यह भी संकेत मिलता है कि रूसी तेल पर मिलने वाली कीमत छूट पहले की तुलना में कम हुई है, लेकिन भारतीय रिफाइनरियां अब भी इसे आर्थिक रूप से फायदेमंद मान रही हैं। यही वजह है कि रिलायंस इंडस्ट्रीज, इंडियन ऑयल और अन्य रिफाइनरियां रूसी ग्रेड के तेल की खरीद बनाए हुए हैं। ऊर्जा सुरक्षा और लागत नियंत्रण की रणनीति के तहत भारत ने रूस से तेल आयात को अपने कच्चे तेल आपूर्ति पोर्टफोलियो का अहम हिस्सा बनाए रखा है।
https://hindi.news18.com/world/america-trump-signals-return-of-strict-sanctions-on-russian-oil-exports-india-worried-ws-l-10576814.html