उत्तर प्रदेश के गाजीपुर जिले के दिलदारनगर के निवासी औरंगजेब खान ने अपनी कड़ी मेहनत और मजबूत इरादों के दम पर न सिर्फ अपने जिले, बल्कि पूरे प्रदेश का नाम रोशन किया है। रिसर्च स्कॉलर औरंगजेब ने अंतरराष्ट्रीय मामलों (International Affairs) और राजनीति विज्ञान (Political Science) जैसे चुनौतीपूर्ण विषयों में नेट परीक्षा पास कर एक उल्लेखनीय उपलब्धि अपने नाम की है।
जामिया से शुरू हुआ शैक्षणिक सफर
औरंगजेब खान ने दिल्ली के जामिया मिलिया इस्लामिया से ‘वेस्ट एशिया मिडिल ईस्टर्न स्टडीज’ में मास्टर्स की डिग्री हासिल की। यहीं से अंतरराष्ट्रीय मामलों के प्रति उनकी रुचि ने आकार लेना शुरू किया। खास बात यह रही कि मास्टर डिग्री की पढ़ाई के दौरान ही उन्होंने पहली बार नेट परीक्षा क्वालीफाई कर ली थी। इसके बाद अपनी पीएचडी के दौरान उन्होंने राजनीति विज्ञान विषय में भी नेट परीक्षा उत्तीर्ण कर अपनी काबिलियत को साबित किया।
तैयारी का बाइबल मंत्र
अपनी तैयारी के तरीके के बारे में बात करते हुए औरंगजेब बताते हैं कि अंतरराष्ट्रीय संबंधों (IR) की पढ़ाई के लिए जॉन बेलिस और स्टीव स्मिथ की किताब ‘द ग्लोबलाइजेशन ऑफ वर्ल्ड पॉलिटिक्स’ (The Globalization of World Politics) को वे इस विषय की ‘बाइबल’ मानते हैं। उनके मुताबिक, इसके साथ ही विश्व इतिहास और मौजूदा अंतरराष्ट्रीय घटनाओं पर गहरी पकड़ रखना सफलता की असली कुंजी है।
परीक्षा एक मनोवैज्ञानिक युद्ध
औरंगजेब का मानना है कि नेट या इस तरह की कोई भी बड़ी प्रतियोगी परीक्षा सिर्फ किताबी ज्ञान का खेल नहीं है, बल्कि यह एक साइकोलॉजिकल वारफेयर की तरह होती है। साल 2024 से लगातार परीक्षा दे रहे औरंगजेब छात्रों को निरंतरता बनाए रखने की सलाह देते हैं। उनका कहना है कि हार न मानना और लगातार कोशिश करते रहना ही आगे बढ़ने का एकमात्र रास्ता है।
फर्स्ट पेपर पर खास ध्यान
औरंगजेब बताते हैं कि परीक्षा में फर्स्ट पेपर यानी शिक्षण और अनुसंधान योग्यता की तैयारी बेहद अहम होती है। उनके अनुसार, भारतीय राजनीति, इतिहास और भारतीय राजनयिकों (Indian Diplomats) के कार्यों का गहराई से अध्ययन करना सफलता को सुनिश्चित करता है।
दौड़ नहीं, यह मैराथन है
औरंगजेब खान का मानना है कि नेट-जेआरएफ की तैयारी कोई छोटी दौड़ नहीं, बल्कि एक मैराथन है। वे कहते हैं कि दूसरों से तुलना करने के बजाय खुद को बेहतर बनाने पर ध्यान देना चाहिए।
असफलता आए तो उसे तैयारी का ही हिस्सा समझिए। लगातार पढ़ते रहिए, क्योंकि सफलता अक्सर उसी को मिलती है जो मैदान नहीं छोड़ता।
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